Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

Archive for the ‘Poems by Friends’ Category

तुम निर्बाध हो, प्रवाह हो

Posted by Rewa Smriti on July 18, 2017

I am posting one of the most beautiful poem I’ve ever read. This is written by one of my very good friend, a navodayan Anurag Ranjan. He is one of my favorite poet of this era. I enjoy reading his each and every poem. His Poetrylike music, draws a picture of things or emotions to which we can relate and we can feel that again through poetry.

दिल और दिमाग के पेच में उलझी हुई
नहीं नहीं ये तो तुम हो ही नहीं सकती
तुम निर्बाध हो, प्रवाह हो
और उससे भी बड़ी बात
कि तुम मेरी लेखनी की
पहली नायिका हो
सच में!
मैं आज भी वहीं हूं
और वहीं रहना भी चाहता हूं
जहां तुम में मेरी मां दिखी थी
वह लगाव आज भी जस का तस है
सभी रिश्ते-नातों के बीच
मैं जानता हूं सबकुछ,
शायद तुम को तुमसे ज्यादा
तुम छुपा भी नहीं सकती मुझसे
लेकिन
तुम तो आदर्श हो, प्रेरणा हो
सोच हो, साधना हो
और इसी कसौटी पर ही
नायिका सूत्रधार बनी रहेगी
मेरी हर रचना में
अपनी लेखनी से
तुम्हें अमर करने की चाह
बस यूं ही
जो शाब्दीक भी नहीं, भाषीक भी नहीं!
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यायावर

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