Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

कौन हूँ मैं…

Posted by Rewa Smriti on October 31, 2013

This is a guest post sent by one of my dear junior Shweta Singh. I am sorry dear for taking time to post it here.

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,

खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,

रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,

वो एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं…..

सबको प्यार देने की आदत है हमें,

अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,

कितना भी गहरा जख्म दे कोई,

उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें…

इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,

सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,

जो समझ न सके मुझे, उनके लिए “कौन?”

जो समझ गए, उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,

आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,

दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं…

अगर रख सको तो निशानी,

खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ!!!

——————————

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3 Responses to “कौन हूँ मैं…”

  1. Ranjeeta said

    Just a beautiful poem. Appreciate it!

  2. Kavitayein likhne aur kavitao me jeene me bahut fark hai…

  3. richa said

    Very nice…..heart touching

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