Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी…

Posted by Rewa Smriti on August 15, 2012

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आए
ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी

जब घायल हुआ हिमालय ख़तरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा सो गए अमर बलिदानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी

जब देश में थी दीवाली वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली
क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी

कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी

थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बंदूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गए होश गँवा के
जब अंत-समय आया तो कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफ़र करते हैं

थे धन्य जवान वो अपने
थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
जय हिंद जय हिंद की सेना
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद

– प्रदीप

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3 Responses to “जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी…”

  1. Arvind Kumar said

    nice di……

  2. A great post.I remember when I was a child Our prime minister sh jawahar Lal nehru got caried over by hearing Lataji sing this song and tears rolled out from his eyes.
    But what a pity remixes and remakes have not spared this patriotic song also.Is this generation of musicians have paucity of convictions and innovation? Why the sacred feeling of patriotism recquire a piracy, is a point to ponder.
    Nevertheless I am moved by your gesture to spread the great feeling for our nation.Thanks and Greetings for independence day

  3. drakyadav said

    जिनके पास न रोटी है . न वस्त्र , न शिक्षा है , न छत , उनसे क्या पूछिए , क्या है स्वतन्त्रता दिवस , स्वतंत्रता दिवस तो मनमोहन को लिखा है , जो लालकिले पर तिरंगा फहराएंगे या कि प्रणव मुखर्जी जिनकी लाटरी लगी है ………..

    पिंजड़े में बंद परिंदों को वास्ता क्या ? इन झमेलों से,
    चमन में कब खिजां आई , चमन में कब बहार आई।
    भूखे प्यासे , शोषितों को जिनki मिहनत – मजदूरी के पैसे .
    लूट लिए पटवारी ने , वे बेचारे , जनतंत्र -तिरंगा क्या जानें ?
    बोलने की ही नहीं जीने और भूखे न मरने की भी आजादी होनी चाहिए , झंडे लहराने और लाल किले से लफ्फाजी करने से आजादी का कोई अर्थ नहीं —–अहलुवालिया के टायलेट में तीस लाख का टाइल और दूसरे भारतीय को तीस रूपये रोज पर मर मर के जीती जिन्दगी , क्या हमे शर्म नहीं आती इस आजादी के जश्न पर …..पूरी आजादी चाहिए …..पूरी आजादी मुबारक हो …..जबतक भ्रष्ट नेताओं /अफसरों को जेलों में न डाला जाय , आजादी नहीं, हम इन नेताओं और अपनी ही कायरता के गुलाम हैं ,,,,,
    मेरे ब्लॉग पर आप सब को आमंत्रण हैं -http://drakyadav.wordpress.com/

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