Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

वेदना…

Posted by Rewa Smriti on June 18, 2012

Here is some content of an email that  I have received from Abhijit. I am sharing his poem below.

Hi Di,

It was 6th may when i was with Iqbal sir and Aarti mam in the same coach in seemanchal express while coming to Delhi from katihar and as you know I was one among the fortunate to go for many sports tour with Madan sir. I am speechless….I don’t know what to write ……some time its better to be silent but if something comes to my mind after the accident, it is all about shattering faith in almighty …..and then today I got another news regarding one more navodayan, Kundan is no more. I can not stop myself and I have written something…a poem on behalf of navodaya parivar….its actually my anger against GOD.

वेदना पर वेदना की
मार बढती जा रही है
लथपथ नयन,संवेदना की
धार बढती जा रही है

सोचता किसको मैं कोसूं
भाग्य को या वक़्त को
या की मिथ्या है जगत
अभिव्यंजना “अनुरक्त” को

जो बना सकते धरा को
स्वर्ग, उनको छीनता है
है नहीं देवत्व, भगवन
ये तुम्हारी दीनता है

यह तुम्हारा प्रेम है तो
प्रेम अपने पास रख ले
और जमी पे आ अभी
मेरे गम का स्वाद चख ले

हिल गया हूँ प्रेम की इस
वेदना की मार से
डर गया हूँ इस जगत में
हे प्रभु तेरे प्यार से

है अगर निस्वार्थ तू तो
क्यूँ नहीं ये सोचता है
और मेरे नीड़ से त्रिन त्रिन
भला क्यों नोचता है

सेकड़ो के वे नयन थे
और थे खुद राह भी
भोगी होगा तू प्रभु
हम अगणित के आह की

है तेरी बिगड़ी जो दृष्टि
नवोदय परिवार पे
हम भी करते है विनय
हे प्रभु बड़े प्यार से

जो गए तेरे गगन पे
तुम उन्ही से सीख लेना
और जितनी भी जरूरत
ज्ञान की सब भीख लेना

मेरे इस छोटे से घर से
क्यों मोतियों को लूटता है
तेरे हर इस कृत्य पर
विश्वास तुझपर टूटता है

भक्त है तेरे प्रभु हम
और ये मेरा अधिकार भी है
तू जहाँ का है खुदा
वो मेरा संसार भी है

बंद कर दे “प्रेम वर्षा”
“जल” से भी हम जल रहे हैं
तू नहीं समझेगा, कितने
पीड़ में हम चल रहे हैं!

This above poem is a tribute to our beloved Iqbal sir and Madan sir and a dear friend Kundan.

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9 Responses to “वेदना…”

  1. Dear Abhijit,

    I feel like Iqbal sir is still there and talking to me. I believe, they are around us.

  2. Nidhi said

    बंद कर दे “प्रेम वर्षा”
    “जल” से भी हम जल रहे हैं
    तू नहीं समझेगा, कितने
    पीड़ में हम चल रहे हैं!

    sad nd nice poem.

  3. […] वेदना […]

  4. Rohit Sah said

    really very nice peom

  5. Amrita said

    वेदना पर वेदना की
    मार बढती जा रही है
    लथपथ नयन,संवेदना की
    धार बढती जा रही है…
    heart-touching… we will never 4get u Sir…

  6. Rupali said

    Nice one.

  7. Shaan said

    जो बना सकते धरा को
    स्वर्ग, उनको छीनता है
    है नहीं देवत्व, भगवन
    ये तुम्हारी दीनता है

    यह तुम्हारा प्रेम है तो
    प्रेम अपने पास रख ले
    और जमी पे आ अभी
    मेरे गम का स्वाद चख ले

    हिल गया हूँ प्रेम की इस
    वेदना की मार से
    डर गया हूँ इस जगत में
    हे प्रभु तेरे प्यार से

    बंद कर दे “प्रेम वर्षा”
    “जल” से भी हम जल रहे हैं
    तू नहीं समझेगा, कितने
    पीड़ में हम चल रहे हैं!
    nice lines di seams like mine own feeling…

  8. Satyajeet said

    Nice poem, Hope ‘after death’ is more beautiful than life, who knows…

  9. […] वेदना […]

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