Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

जिम्मेदारी लेना सीखो अन्ना !

Posted by Rewa Smriti on October 19, 2011

This is a guest post from my friend Roushan!

अन्ना हजारे और उनके साथियों की कांग्रेस को हराने की अपील को लेकर कांग्रेस में काफी कुछ कहा जा रहा है . मजेदार बात यह है कि अन्य राजनैतिक दल इस बात पर खामोश हैं. शायद उनकी खामोशी इस बात को लेकर है कि कल को अगर इसी तरह की अपील उनके खिलाफ आ जाती है तो वो क्या करेंगे.?

ख़ैर जैसा कि अन्ना हजारे के एक साथी ने कहा कि सत्ताधारी दल होने के चलते लोकपाल बिल पास करवाने की जिम्मेदारी कांग्रेस की बनती है , अभी तूफ़ान का सामना कांग्रेस को करना लाजिमी है. कांग्रेस के लिए यह बड़ी ही अप्रिय स्थिति बन आई है और वह निश्चित ही इसे लेकर परेशानी में है.

हमारा मानना है कि जनतांत्रिक देश के जिम्मेदार नागरिक होने के चलते अन्ना और उनके साथियों को चुनावों के लिए मुद्दे तय करने और जन साधारण से उन मुद्दों पर किसी को वोट देने या न देने की अपील करने का पूरा हक़ है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है चाहे यह किसी एक राजनैतिक दल या पूरी की पूरी राजनैतिक व्यवस्था को कितना भी नागवार क्यों न गुजरे. इससे पहले भी सिर्फ एक मुद्दे को लेकर चुनाव हुए हैं अगर किसी को यह महसूस होता है कि चुनाव में मत देने के लिए कई मुद्दों को एक साथ देखा जाना जरूरी है उसे शायद “वो मेरी ही माँ नहीं पूरे देश की माँ थीं ” या “राम लला हम आयेंगे मंदिर वही बनायेंगे ” नारों या ऐसे ही तमाम नारों के साथ लडे चुनाव नहीं याद हैं . जब ऐसे मुद्दों पर चुनाव लडे जा सकते हैं तो लोकपाल मुद्दे पर क्यों नहीं. यह तमाम बाते अन्ना  और उनके साथियों की सही हैं और हमेशा सही रहेंगी बस हमारा प्रश्न है कि क्या अन्ना जिम्मेदार नागरिक नहीं हो सकते थे?

हमारा स्पष्ट मत है कि सही मांग और सही बात के बावजूद अन्ना और उनके साथी शुरू से गैर जिम्मेदार हैं.
१ . जब लोकपाल बिल के लिए संयुक्त कमेटी बनायी गयी थी और उसमे सरकार से इतर कुछ लोग और शामिल किये गए थे जिन्हें अन्ना हजारे ने चुना था तो क्या अन्ना हजारे उस कमेटी में अन्य दलों के सदस्यों की सदस्यता की मांग नहीं कर सकते थे? उन्होंने ऐसा नहीं किया (उनका बाद में यह कहना कि वह चाह रहे थे पर सरकार नहीं मानी स्वीकार्य नहीं है क्योंकि उन्होंने उस समय इस मुद्दे की चर्चा तक नहीं की थी ) क्योंकि उन्हें लगता रहा है कि वह जो सोच रहें हैं वही अंतिम सत्य है बाकी पूरे देश में कोई कुछ सोच ही नहीं सकता .
२. जब ऐसी किसी संयुक्त कमेटी को हजारे और उनके साथी स्वीकार कर रहे थे तो क्या उनकी यह जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि वह इस कमेटी को एक सही अंजाम तक पहुंचाने का प्रयास करते. दलील फिर दी जाती है कि सरकार नहीं तैयार थी. लेकिन आये दिन अखबारों और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में वह और उनके साथी सिर्फ और सिर्फ धमकाने की मुद्रा में ही नजर आते रहे. एक भी बयान किसी ने ऐसा दिया था कि हम प्रयास कर रहे हैं या और कुछ ऐसा जो जिम्मेदारी का बोध कराता हो? कड़ा लगेगा पर तथाकथित टीम अन्ना के लोगों (अन्ना हजारे समेत ) के आचरण और भाषा हमेशा उन राजनेताओं से भी गयी गुजरी रही जिनकी वह आलोचना करते हैं.

ख़ैर बीच में रामलीला मैदान हुआ . उसमे क्या रहा कैसा रहा यह सभी ने देखा. अब सीधे आते हैं चुनाव के मुद्दे पर
अन्ना के एक साथी ने यह पूछने पर कि सपा और बसपा तो खुले रूप में जन लोकपाल की विरोधी है तो आप उनके खिलाफ प्रचार करने कि बात क्यों नहीं करते, उन्होंने बताया कि इन दलों का लोकपाल बिल पास करवाने में कोई योगदान नहीं होगा इसलिए वह सिर्फ कांग्रेस को हराने की बात कर रहे हैं. अब क्या यह लोग बताएँगे कि अगर यही बात है तो राज्यों के विधानसभा चुनावों में आप प्रचार की बात क्यों कर रहे हैं . राज्य की विधानसभा तो लोकपाल बिल पास कर नहीं सकती. अगर कांग्रेस भ्रष्ट है इसलिए आप कांग्रेस के खिलाफ हैं तो बाकी भ्रष्टों पर इनायत क्यों कर रहे हैं और अगर सिर्फ लोकपाल ही मुद्दा है भ्रष्टाचार नहीं तो राज्यों की विधान सभाओं से तो कोई लेना देना ही नहीं है

आते हैं हिसार की बात पर ! वहाँ कांग्रेस पहले ही कमजोर स्थिति में थी. लड़ाई तो ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अजय चौटाला और भजनलाल के बेटे कुलदीप विश्नोई में थी . हजारे ने कहा था कि अगर लोकपाल बिल शीतकालीन सत्र में पास नहीं हुआ तो वह कांगेस के खिलाफ प्रचार करेंगे . मजे की बात तो यह है कि इतना बोलने के बाद याद आया कि शीत कालीन सत्र तो अभी शुरू नहीं हुआ है , हजारे और उनके साथियों ने तय कर लिया कि शीत कालीन सत्र का इन्तजार क्यों करें अभी से कांगेस के खिलाफ प्रचार शुरू कर देते हैं और पहुँच गए हिसार . प्रश्न यह उठता है कि अगर कांग्रेस भ्रष्टाचार का दूसरा नाम है इसलिए उसे हराना है तो फिर जिताना किसे है ? अगर हजारे में जिम्मेदारी का भाव होता तो वह एक प्रत्याशी खडा करते और कहते कि यह हमारा प्रत्याशी है स्वच्छ है और लोकपाल का समर्थक है . आप इसे वोट दें . उस प्रत्याशी को (केजरीवाल तो अभी सरकारी सेवा में हैं चुनाव लड़ नहीं सकते , किरण बेदी या फिर शान्ति भूषण लड़ सकते थे ) आसानी से जिताया जा सकता था और वह सांसद बन कर शीतकालीन सत्र में लोकपाल के सपने को यथार्थ में लाने के लिए खडा हो सकता था.

तो हिसार में अन्ना ने नहीं कहा कि किसे जिताना है. कुलदीप विश्नोई या अजय चौटाला ? उम्मीद है हजारे को इनका इतिहास पता होगा.
अन्ना प्रत्याशी नहीं उतार सकते वो वोटबैंक की नहीं लोगों की राजनीति करते हैं. एक सहज प्रश्न उठता है कि जब देश के सबसे बड़े विपक्षी दल भाजपा के अध्यक्ष ने पत्र अन्ना को भरोसा दिलाया है कि वह जन लोकपाल के प्रावधानों से सहमत हैं तो अन्ना भाजपा को समर्थन की अपील क्यों नहीं कर देते? कांग्रेस को हराने के लिए इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है . लोगों के पास एक विकल्प होगा . भाजपा को समर्थन मिल जाय तो वह सरकार बनाने की स्थिति में आ सकती है. लेकिन अन्ना के साथी वह भी नहीं कर सकते, इन सब के लिए जिम्मेदारी लेनी पड़ती. आकांक्षाओं के समुद्र में गोते लगाना पड़ता . अगर शौक दूसरों को गैर जिम्मेदार बोलना ही हो गया हो तो जिम्मेदारी क्यों रास आने लगी .

श्रीमान अन्ना हजारे दूसरों को नसीहत देना और पागलखाने जाने की सलाह देना थोड़े दिन के लिए रोक के एक बार जिम्मेदारी लेना भी सीखो . बहुतों ने भरोसा किया है तुम पर!

Advertisements

12 Responses to “जिम्मेदारी लेना सीखो अन्ना !”

  1. kaifee anwer said

    I totally agree with Raushan. Lets all convey such a nice message to Team ANNA. I personally suggest that whatever we write in blog or any online forum or offline discussion over tea, closed room, dinner table, train journey etc is useless until our view reach to the right person where our words can be part of action. I am in Delhi. If you plan I with a team can meet team ANNA committee in Delhi.

  2. Rewa Kheta said

    Very well written, composed. And I guess almost everyone’s thoughts are sum up in this one article. Good job Roushan 🙂

  3. Well said Roushan and I do agree with you!

  4. Anupam said

    I strongly disagree. Blog is written just based on statements and reports which appeared in media. Politics played by any party is much more deep and complex. The very strategics move of Team Anna is not wrong. People should worry more about irresponsible politicians from all parties who make random statements and trying to derail the whole movement but not ready to accept a very problem of corruption in this country.

    Mahatma Gandhi had hit the British most when he hit them at financial front and that was by asking people to burn the foreign made cloths and wear Khadhi and by not cooperating them in India. Khadhi is not important because this is sacred by any means but its important because Mahatma used this as a great tool to hit the Britisher’s commercial interest in India. The way to do so was definitely non-violence but the hit was on where Britishers felt the pain and then only they took Gandhi seriously. Gandhi used the international media very carefully to make the world aware of India’s condition. I think its important to understand the politics of Gandhi too and that was very well thought and executed well. In today’s time a political party feels the pain only when their vote share is at stake otherwise they don’t respond people. And there are hundred of examples you can find in India where deprived people do stroke but no one listen to them and they are kicked out from road by Police [These are not covered by media so people on internet don’t think it exist]. So I strongly feel that this is a one of good strategy by Anna team to hit these political parties and UP is a place where Congress has very high stake and Rahul himself is working hard and for congress people are worthless and Rahul is God. I hope they must respond in Winter session on Lokpal bill. There can be other better ways too but I strongly feel that instead of yelling on team Anna, we should come forward with some good plans and ways to make these people understand about the common man plight.

    I may agree on one thing and that is lokapl bill must be discussed well by all groups of people and then made and thats happening in standing commitee. But I feel (not claim) that Team Anna also wants a strong lokapl bill [not strictly jan lokapl bill] but they want to keep the pressure on. Team Anna knew that congress candidate would anyway loose from Hisar and so they used this plot as a nice political stunt to spread the message across India and mostly poor people who really VOTE (you and I and intellectuals dont) because all political parties survives on these poor people only.

    I wish them all the best for putting so much effort despite the criticism from all sections of so called intellectuals. I have a feeling Gandhi would have gone through same in his time. And remember people who dare to experiment with different methods only can succeed or fail, Mahatma, Bose and Bhagat singh are fine examples of these.

  5. Anupam said

    Just wanted to give an example of media hypocrisy. What Arvind said was totally misquoted and put as a title of this article. This is what our respected journalists do. When the source of knowledge is itself infected; its very tough for common people like us to understand the scene well.

    http://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/Only-Sonia-Gandhi-can-bring-strong-Lokpal-Arvind-Kejriwal/articleshow/10409153.cms

  6. I supported Anna and his team wholeheartedly.But the appeal against congress is unfortunate.This is another form of violence.Doing this makes this team no different from a political party or a politician.They are taking people for granted alike politicians.Which I feel is wrong.When you are against something you protest.They did that.But gunning the ruling gov.is bad.We can see the result.They are at war among themselves.By doing this you are not doing any good to Lokpal demand and your pure ambitions.

    I would quote a very raw example. A bad girl do not become good that you can marry just because she submits to your demand.If she doesn’t you can not say she is a hooker and ask people to reject her.

    If you can not be patient then you must either preach the divide and rule way or the Hitler’s way.They are doing none of these.

    Cheers.

  7. Very well written, composed. But i want to say one thing Every one is free to say but it should not hurt any one and its apply on me, you and kegriwala too

  8. Bond said

    Nice post rewa

  9. राहुल जैसे शिक्षा की कमी से पनपे इंसान को अपना नेता मानने वालों को ये सजा मिली, इसका कोई दुःख नहीं|

    आजकल अन्ना और उनकी टोली लतीफों में कुछ ज्यादा ही व्यस्त है| जिसे मीडिया की आदत लग जाये उसे हर रोज खुराफात तो करना ही होता है| दांत निपोरते अन्ना को देखकर यही कहने का मन करता है की मैं अन्ना न था, न हूँ और न रहूँगा|

  10. Aditya said

    I am neither against Anna nor for Anna, but the point is we have a lot of corruption. Another fact is since independence India in mostly ruled by congress, some point of time by other party.
    Who is responsible for corruption, our system, loopholes in system? We select or MP’s and MLA every five. Do we have any system to evaluate them? NO? Whom you blame ?
    Ask this this question yourself?
    We need some system to control this, only than we will able to say than we are in democracy……..
    We had good number of corruption cases in India, from how many of this scam we were able to recover the money? These all money was belonging to the PEOPLE of India.
    We need some change………..
    Choice is ours… we do through election or other method…………………………

  11. आपको शक्रिया ऐसी दमदार बाते लिखने के लिये,

  12. tej narayan said

    सत्य वचन… अन्ना हजारे दरअसल चुनिंदा मुद्दों पर क्रांति की कोशिश के लिए जाने जाते हैं… जैसे राज ठाकरे (एमएनएस) की उत्तर भारतीयों के प्रति नफरत को नजरंदाज कर वो मराठी मानुस के मुद्दे पर एमएनएस को अपना समर्थन देते हैं… गुजरात दंगों पर एक शब्द नहीं बोले लेकिन मोदी की तथाकथित विकास पर जमकर तारीफ की… लोकपाल के मुद्दे पर भी वो यही कर रहे हैं… खैर.. ये मीडिया जनित क्रांति का बुलबुला जल्द फूटेगा..

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: