Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे!

Posted by Rewa Smriti on August 15, 2010

स्वतंत्रता दिवस की बधाई देने सुबह उठकर सर्वप्रथम माँ को फोन लगायी. यहाँ मौसम काफ़ी अच्छा है, हल्की – हल्की बारिश हो रही है. जैसे मानो अपनी स्वतंत्रता का जशन ये घूमड़ते बादल बरस कर मना रहे हैं. हल्की फुहारों का आनंद लेने कमरे से बाहर निकली. अनायास बादलों को घिरते देख दिल ने सोचा चलो कुछ लिखा जाए.

अभी हाल में कुछ हिन्दी ब्लॉग्स पढ़ी. कुछ बातें सोचने पर मज़बूर कर दिया और दिमाग़ में कई सवाल भी छोड़ गया. कोई भी पुरुष बिना सोचे समझे स्त्रियों के मामले में अपनी राय क्यूँ देने लगे हैं? कुछ लोगों को किसी स्त्री के स्वतंत्रता से क्यों इतनी परेशानी हो रही है? सदियों से गाय और बकरी समझी गयी नारियों से पुरुषों को डर क्यों लग रहा है? सवाल कितना ही जटिल हो किंतु कुछ सवालों का जवाब अपने अंतर्मन में झाँकने से ज़रूर मिलता है. स्पष्टवादी हूँ, इसलिए स्पष्ट लिखना एवं स्पष्ट रूप में अपने विचारों को रखना पसन्द है. अगर किसी को इससे भी शिकायत है तो माफी नही माँगूंगी क्योंकि स्वतंत्रता दिवस यही कह रहा है कि, बोल कि लब आज़ाद है तेरे!

मुझे ऐसा लगता है कि पुरुषों को परेशानी नारियों की स्वतंत्रता एवं खुले वातावरण में अपने खुले मनोवृति के होने से है. इससे भी ज़्यादा भय उन्हें आत्मविश्‍वासी नारी के अस्तित्व से है. पृथ्वी का अस्तित्व स्त्रियों के अस्तित्व से जुड़ा है. अब जब नारियों ने अपनी अस्तित्व की पहचान करने लगी हैं, और इस पहचान से मिल रही आत्मशक्ति से सिर्फ़ पुरुषों को ही नही बल्कि कुछ रूढ़िवादी औरतों को भी डर है! समाज के ऐसे पुरुष वर्ग उन नारियों के सन्दर्भ में अशलील एवं अपशब्दों का इस्तेमाल तथा उनकी स्वतंत्रता एवं संस्कार पर सवाल करते हैं. ऐसा कर वे कुछ पल के लिए अपनी झूठी एवं बेबुनियाद अहं को संतुष्टि देते हैं, जिसकी हर जगह भर्त्सना ही होती है.

नारी स्वतंत्र है और किसी को भी उसके स्वतंत्रता से शिकायत या परेशानी है तो वो उसकी  समस्या है. ऐसे लोगों को अपने उपर काम करना अति आवश्यक है, ताकि वे खुद के दबे एवं संकुचित विचारों को विस्तार दे सके. समय ने अपनी चाल बदल दी है और अब एक ही नदी का पानी शेर के साथ बकरियाँ भी पीने लगी हैं. ये अलग बात है कि शेर को बकरियों की यह स्वभाव अवश्य ही बर्दास्त नही हो रहा है. वर्तमान समय की माँग यही कहता है कि ‘शेर-ए-हिंद’ तुम्हे बदलना होगा, वरना आत्मस्वाभिमानी बकरियों के अस्तित्व से तुम्हे हर पल ख़तरा है!

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31 Responses to “बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे!”

  1. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

    सादर

    समीर लाल

  2. rohit said

    रीवा को आजादी की हार्दिक शुभकामनाएं कुछ कुछ लेट.दरअसल कल औऱ परसों दिल्ली में मस्त छमाछम बारिश हुई..फिर बरखा रानी ने पकड़कर ऐसा धोया कि पूछो मत…बार बार धोया..जब जब आई जमकर धो गई..उस चक्कर में देर से बैठा नेट पर..फिर पोस्ट से पहले चटियाना शुरु हो गया..बेचारा ..सात समंदर पार से लेकर सात घर दूर बैठे यारों से.लगता है अब तो नेट का ही आसरा है….

    अब रहा नारियों से घबराने का…तो रीवा नारियों से आज से नहीं बाबा आदम के जमाने से आदमी डरता आ रहे हैं..तभी तो उसे हमेशा दबा के रखा गया…पता था कि अगर नारी अपनी रौ में आ गई तो किसी बाला को बला बनते देर नहीं लगेगी…अरे हम आम लोगो की हैसियत क्या नारि से डर कर पहले से ही उसे काबू में करने की बात तो संत लोग कर गए हैं….नहीं तो उसे नरक का द्वार कहकर उससे दूर रहने की नसीहत क्यों देते….बुद्ध..कबीर….हीहीहीहीही…और स्वर्गीय संजीव कुमार जी भी फिल्म अनामिका में गा गए हैं…कि आग से नाता..नारी से रिश्ता….अब किसकी बात न मानें..बताओं तुम्हीं….क्योंकि इस मामले पर कुछ बोलो तो नारी विरोधी..न बोलो तो नारी का गुलाम…..अपना तो जीना भी मुहाल है…

    वैसे लगता है देर देर से लिखने की आदत डाल ही है….या फिर बारिश और पलाश से झगड़ा हो गया है तुम्हारा….जो नराज हो गई वो..हैं बताओ बताओ

  3. yaayaawar said

    हमें यह समझाना होगा की भले ही वह ज्ञानी न हो, उसे लोकाचार का ज्ञान न हो किन्तु वह अवसरवादी है|

  4. Ranjeeta said

    “समय ने अपनी चाल बदल दी है और अब एक ही नदी का पानी शेर के साथ बकरियाँ भी पीने लगी हैं. ये अलग बात है कि शेर को बकरियों की यह स्वभाव अवश्य ही बर्दास्त नही हो रहा है. वर्तमान समय की माँग यही कहता है कि ‘शेर-ए-हिंद’ तुम्हे बदलना होगा, वरना आत्मस्वाभिमानी बकरियों के अस्तित्व से तुम्हे हर पल ख़तरा है!”

    A very good article strong and well written. Men need to educate them on this matter. Silence has made men more powerful so women will have to break their silence.

  5. Ranjeeta said

    “हम आम लोगो की हैसियत क्या नारि से डर कर पहले से ही उसे काबू में करने की बात तो संत लोग कर गए हैं….नहीं तो उसे नरक का द्वार कहकर उससे दूर रहने की नसीहत क्यों देते….बुद्ध..कबीर….”

    @Rohit

    This is just a myth. The society has so many practices which exploit and suppress women.

  6. Nidhi said

    i knw,u can’t chnge some1 unless d person wnts to chnge.
    why do men use foul language as a weapon fr women?hw v show polite on dem?nd wat wrd cn v use to realy insult such man?
    wy do many men hav prblem wid women’s freedom?

  7. mehek said

    swatantrata divas ki der se badhai rews,bilkul sehmat hai,har nari ek swatantra vyktimatva hai aur wo unse koi nahi chin sakta.

  8. Hi Mehek,

    Thanks dear! Ye apshabdon ke madhyam se sirf nariyon ki swatantrata ko chunauti de sakte hain. Iske alawa kuch nahi kar sakte.

    Ise dekh : http://blog.chokherbali.in/2010/08/blog-post.html

    Rgds.

  9. rohit said

    @
    रंजीता
    आप शायद कहने का तात्पर्य नहीं समझीं। आदमी और औरत का जो भेद हमारे समाज में आना शुरु हुआ तभी से हमारा पतन हुआ। आज नारी तेजी से आगे जा रही है और पुरुष ये तेजी देख कर बौखलाया हुआ है। आगे जाते जाते नारी कई बार ऐसे काम करती है जैसे वो बदला ले रही हो। इस बात को बड़े परिपेक्ष में देखें। जो अमेरिका के लिए सही हो जरुरी नहीं कि वो भारत के लिए भी सौ प्रतिशत सही हो। बात को सिर्फ समझने और विचारों में सामंजस्य बिठाने की है….दोनो को।

    कहां गए मर्द नाम के प्राणी जिनको दर्द नहीं होता। भई….भई अपुन को तो दर्द होता है।

  10. rohit said

    खत फाड़ने के बाद एक रास्ते पर निकल गया। पर किस्मत भी मजे लेती है। हर बार हर रास्ता दोराहे में बदल जाता है.हाहाहाहाहा

  11. plz visit to http://jnvalumni.blogspot.com/2010/09/jouney-from-village-to-oracle-via.html

  12. drvishwassaxena said

    न तो में पुरुष प्रचारक हूँ और न ही स्त्री विरोधी ,किन्तु एक बात से में बहुत ही आहात हूआ हूँ की आज भी इक्कीसवी सदी में,इश्वर द्वारा रची इन दो अधुबुत कृतियों में द्वन्द ज1री है 1 क्या स्त्री और पुरुष परस्पर प्रतिस्प्रधा के लिए बने हैं या की एक दुसरे के पूरक बनने के लिए उत्पन्न हुएं हैं ? हर सफल पुरुष की जननी स्त्री है और हर ऐसी स्त्री का जनक पुरुष है ! यदि किसी सदी में पुरुष ने शक्तिशाली बन नारी का दमन किया है तो उसी सदी में वह उस पैर आश्रित हो गिरा भी है ,यदि आज की सदी में नारी ने अपना वजूद सशक्त करा है तो कहीं न कही अपनी सुकुमारता को चोटग्रस्त भी पाया है 1
    दंभ छाए स्त्री का हो या की पुरुष का पतन की और खीचता है 1 जब देव भी विभिन बंगिमाओं के द्वारा यह सिद्द कर चुके हैं की अंग संपूर्ण दोनों पूरको के मेल से है तो हमारी क्या बिसात है ? स्त्री की प्रगति स्वागत योग्य है किन्तु वह पुरुष को सशक्त करे न की यह याद दिलाये की अब वह कमजोर नहीं है !कमजोर तो वह कभी भी नहीं थी! आज परिवर्तन की एक भीषण घटा जग पर छा रही है जो सबको बहा कर ले जाएगी ऐसे समय की मांग यही है की यह दोनों अपने को सहेज कर रखे और इस तूफ़ान का सामना साथ जुड़कर करें , प्रेरक एवं पूरक बने प्रतिद्वंदी व परिवादी नहीं धन्यवाद्
    डॉ विश्वास सक्सेना

  13. sukirti said

    hey di…..
    another amazing blog……:)
    aaj tak sirf suna tha ki ladkiyo ko hamesha nicha dikhane ki koshish ki jati hai..but aaj jab experience kiya toh laga..ki ab tak jo bhi tha woh sab fake tha……pehli jab nani,mum koi bhi yeh kehti thi ki abhi tumne kuch nahi dekha…bahar duniya bahut kharab hai…magar jaruri nahi ki…sab log bhi kharab ho..kuch acche log bhi hai…..uss waqt main unki baatein mazak mein udda deti thi…bolti thi..kisme itna dum hai ki hum ladkiyo se panga lega…hum ab 21st century mein hai…but ab yeh soch rahi hoon ki main kitni badi bewakoof thi ki unki baaton ko nahi mana.i should have realized that they are milestone ..unke pass toh experience hai..n now i m regretting…..i was really hurt when my prof said that”engg is nt for grlz..go n study something else..” i was shocked ..coz an iitian like him was saying that…they r one of d best brains of India…n wen they talk like that…feels like India is still standing in those days…..when women were discriminated…..haan yeh alag baat hai ki ab tarika change kar diya gaya hai..pehle padhne nahi dete the..n ab padhne dete hai ..toh school n clgs mein demoralize karte hai….neways…wat i learnt from u di..is that….keep the fire inside u..n duniya mein jo aise bolte hai..goli maaro unko..!!!!!

  14. hi di..
    i read above post, really its so disgusting. ye bat jankar mughe aur dukh hua ki ek iitian aise statement diya.IITian jise best brain jana jata hai jab o log hi aise statement denge to baki log kya kahenge.are yar ye 20th century hai ab ladkiyan kisi v field me ladkon se kam nahi hai. kya o abhi v purani sadin me ji rahen hai kya? i think Engineering is suitable for anyone who can handle the worload and the requirements of the job. Your sex doesn’t mean anything; your skills do.engineering type should not be based on gender, but on a passion for what you want to do. Passion will be your key to success, not gender.
    @sukriti di
    dont worry , not all fingers r aquall of my hand…..aap dukhi na ho aap aap apna kam kariye n prove that he is wrong. aur ab thoda majak kar lu wase v aap mechanical ke liye ekdam fit hai.lambi hai ,majbut hai,aapka hath lohe jaisi hai……….so u r fit heheheheheh

  15. sukirti said

    @jitendra : yes beta ..i know that i m totally fit for mechanical……aur koi nahi uss iitian ko toh ab dikha ke rahenge ki yeh kiit hai…n as humare samanta sir kehte hai,,it stands for King of IIT….so yahan pe toh usko jo iit mein dekhne ko nahi mila woh milega…as in grlz r rocking in this clg….!! n will keep rocking until yeh baatein logo ke dimaag se na nikal jaye that”engg is not meant for grlzzz.”
    @rewa di:thnx for ur guidance…. nahi toh main gusse mein kuch bhi ulta palta kar baithti…..!!
    thnx alot…

  16. rohit said

    आखिर रेवा कहां गईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

    इतना तो असली रेवा भी लापता नहीं होती…………….

    http://www.boletobindas.blogspot.com

  17. Ranjeeta said

    @Sukriti
    if you have a strong burning desire, you can achieve anything.
    Who is that fool who says the so called IITians are the best brain? All these iitians live under the illusion that they are the best brain in india.
    Why do men degrade women? As usual, it seems men have a lot to say about the things women shouldn’t do. A woman can do everything.

  18. Anupam Jha said

    IITians are like french men: whatever you say to them,they secretly translate it into their own language and then it means something totally different! Dnt care…

  19. @sukriti di
    its not a tpic between iit n kiit. aur ha aap jo kiit ko king of iit bol rahi hai. i dont agree wid u.i strongly dislike it.becoz ek hi king ho sakta hai aur engg collg me top iit hai isase upper no one.ok aur ha mai ye nahi kah rha hu ki iitian hi sabkuch kar sakte hai.any body can do any thing dosnt matter they r iitan or not,only requirement is will power,great desire. aur plz hum log yaha iit vs any collg par bat nahi kar rahe hai. mai thing is “are girls suitable for engg?” ofcourse widout hesitation YES as i also told erlier “Your sex doesn’t mean anything; your skills do.engineering type should not be based on gender, but on a passion for what you want to do. Passion will be your key to success, not gender.” thats all

  20. sukirti said

    @jitendra: now u r diverting the topic by saying that iit is the king of engineering colleges….
    for ur kind information i would like to say that..no doubt iits r one of best engineering clgs of this country….but u cant say that its best….there r many pvt clgs also…which stand equivalent to iit….i think i dont need to mention their names….n i could say that…coz my bro n sis r in iit….now when u have mentioned clg name thing….i know very well that KIIT stands for..Kalinga Institute of Industrial Technology…..not for King of IIT……kabhi suna hoga tumne….ki baatein samne wale pe bahut asar karti hai……humare clg ke founder hamesha humara moral boost karne n humare mood ko light karne ke liye yeh kehte hai ki “KIIT stands for King of IIT..”..n maine bhi upar mood light karne ke liye hi likha tha…that mah clg is king of iit…….neways i m sorry jitendra sir ..aapko bahut bura laga hai…..ki aapke clg ko chod kar kisi aur clg ko king kaha gaya…..i really apologize for it……. sir…aagey se main aapse particularly sirf aapse kuch bhi kehne se pehle kisiko consult kar lungi..!!!!!

  21. @suki mam,
    aap jo v boli mughe jarea v bura ya taklif nahilaga par ha aapne jo mughe sir kaha to taklif lag gaya. aap jo beta kah kah kar bolte hai na…thats right.mughe achha lagta hai…ok achha ye sab baten chhodiye asali mudda par aaye

  22. Ranjeeta said

    ‘becoz ek hi king ho sakta hai aur engg collg me top iit hai isase upper no one’

    @Jitendra
    no, I strongly disagree with you. it seems you have only heard about IIT, there is life outside IIT’s too..in India stamp(thappa ) matters.who cares for caliber.. so IIT !!

  23. sukirti said

    @ranjeeta di: thnx for d support…
    @jitendra: that’s why i called u sir….coz u belong to a king institute n in india ofcourse thappa matters….n iitian r like god in this country….har ke mummy daddy kehte hai ki “karna hai toh iit compete karo…warna engg kya karna?” …..
    sirf humare kehne se kuch nahi hoga……mentality thodi parents ki bhi change karnmi hogi…… main apne ghar pe yeh dekh sakti hoon..mere 2 bhaiya n didi..iit mein hai…n unfortunately main kiit mein…..so every time jab bhi ghar mein sab ek saath mein baith discuss karte hai……toh yahi kehte hai ki “tum unn logo ki tarah iit mein nahi ja payi…..kya karlogi kiit mien padh kar..”..
    it really hurts….thnx to mum ,paa,…n nanu-nani ….they r great support to me…..jab bhi koi aisa kuch bolke mera confidence down karna chahta hai……toh mere behalf mein woh log jawab dete hai..!!!!

  24. @Sukriti,

    Do you have will power? Will power is nothing but the power of choice. If yes, then why to worry? Hmmm…whatever your professor said to you, just forget that and enjoy your college life!

    You know, humans are mostly identified with their thinking. It doesn’t matter whether he/she gets degree from BITs/IITs/IIMs or etc. from any other universities because these universities are not teaching students “how to think”! Kash in universities mein jane se gyan or thinking viksit ho jata to aaj tumhe aise comment sunne ko nahi milte.

    Girls have full freedom of choosing their career. And anyone who passes such “not suitable comments”, are “not suitable” for education sector. That’s all!

    with love.

  25. Nidhi said

    “i was really hurt when my prof said that”engg is nt for grlz..go n study something else..” i was shocked ..coz an iitian like him was saying that…they r one of d best brains of India”

    @sukriti
    IITians r 1 of d best brains of India? 😆
    u joking????? 🙂
    IIT is just a hype.d peple who graduated frm IITs r ARROGANT extreme EGOISTS nd ur prof. wil also com under dat catgory.
    IITs hav failed in giving dem humanity.

  26. satyajeet said

    why men don’t wear saries n churies nd ghaghras? Why no women organisations came fwd wen musharraf said “maine bhi churiya nai pahan rakhi hai”? whole world should have told “pahno na pahno, hame kyu batana jaruri samjha? Kuchh chije kudrati hai. Aur koi bandish ki nahi. Bhedbhav ki nahi, haushale ki bhi nahi, competition ki bhi nahi, bat kuch aisi hai jaise kisi mahila ya bujurg ko ijjat dete hue koi naujawan bhid bhad me apna seat unhe de de. Aur mechanical hi ek degree nahi hai. Kai kam ladkiya behtar kar sakti hai. Kuch kam ladke behtar kar sakte hai. Bt ikka dukka apwad agar chod diya jay to ladkiyo ke kam ladke behtar nahi kar sakte. Karne ki jarurat hi nahi hai.Gulab ko kamal banane ki kya jarurat hai . Kamal gulab nahi ban sakta. Baki agar mechanical engg karne se hi agar sare fasle khatam ho jate hai, phir bat hi kya hai ! Waise mere hisab se in few particular kind of job, mech. Is not suitable 4 girls. Jaise ki bachcha to ab aadmi ne bhi jan ke dikha diya. Bt still i feel, women r more suitable for the job.

  27. satyajeet said

    Baba bhairav, kahi maine bhang to nahi pi rakhi thi, mere mob ka screen bahut chota hai. So mujhe dikha hi nahi ki yaha itne sare dhurandhar ate pare hai. waise mere gyan chakshu puchne se hi khulte hai. Chalo man liya ki iitians r d best brains. Phir koi iitian hussain jaisa chitrkar, ya phir ritik jaisa dancer, ya phir sachin jaisa cric, ya phir …. Xyz… Kyu nahi hai, ek aadh hai bhi to sare wahi se kyu nahi hai, as far as i can think each individual is a masterpiece n jarurat hai to us chhupi pratibha ko nikharne ki. aur koi kisi se better ho nahi sakta, jaise kamal gulab nahi ho sakta…. Ha Ha Ha.

  28. Satyajeet said

    waise mai nidhi ke vidhi se sahmat nahi hu.. dhathure ka fool bhi fool hi hota hai na

    “It doesn’t matter whether he/she gets degree from BITs/IITs/IIMs or etc”

    sach hai bhaiya.. yahi satya hai..

  29. Lopa Sarkar said

    I just saw ‘Bol’ last night and it leaves behind questions that shake many rigid philosophies.

    It is important to observe that, even if one in five women in India who have been in a relationship have experienced domestic violence, but is not known openly in society. Now also, it is disgraceful for a woman to speak. Men don’t know how to accept the women. We only want to encourage these women to “Break the Silence” and put an end to this cycle of cruelty.

  30. You really could wander over to the web site and learn datas you are looking for.

  31. Always a pleasure to read your blog, it seems you really do have a talent for creating great content!

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