Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या…!

Posted by Rewa Smriti on February 15, 2009

शर्म नही आती इन राजनेताओं को अपना राजनैतिक उल्लू सीधा करने में! अपनी मातृ संस्कृति – सभ्यता की बोली लगाने में! अपनी ओछी महत्वकांक्षा की पूर्ति के लिए धर्म को हथियार बनाने में! देश भक्ति के नाम अपनी ग़लत शक्ति की मनमानी करने में! वेश्यावृति करने में, और अपने पुरुषत्व पर! अरे हाँ, मैं भूल गयी थी कि इनके पास सारी संपत्ति तो है, लेकिन लज़्ज़ा की संपत्ति के मामले में कंगाल हैं! “बोया पेड़ बबुल का तो आम कहाँ से होये?” ये संपत्ति ना उधार ली जा सकती है, ना ही दी जा सकती है. इसे तो अपने बुद्धि – विवेक से अर्जित किया जाता है, और यही परिपक्वता है समाज़ की, राष्ट्र की, व्यक्ति की, और पूरे विश्व की!

अगर उम्र के पड़ाव को पार करने से ही परिपक्वता आती है, तो मुझे खेद है कुछ हिन्दी ब्लॉंगर्स पर जो उम्र के अवसान पर हैं, लेकिन इतना भी संज्ञान नही है कि वो अपने ब्लॉग में क्या और कैसी चीज़ों को तस्वीरों के साथ परोस रहे हैं! वो ये कैसे भूल जाते हैं कि उनकी पीढ़ियाँ भी कल उनका ब्लॉग पढ़ेंगी? कितने शर्मनाक तरीके से पोस्ट लिखे जा रहे हैं, और बहिष्कार कर रहे हैं. बहिष्कार कीजिए! शौक से कीजिए! लेकिन थोड़ा लिहाज़ करना भी ज़रूरी है! कलम में समाज को सशक्‍त बनाने की ताक़त होती है, कृपया राजनेताओं की तरह संस्कृति की बोली मत लगाइए, बल्कि युग निर्माण में सकारात्मक भागीदारी निभाएँ.

“नाच न जाने आँगन टेढ़ा!” अपने व्यक्तित्व का निर्माण तो कर नही सकते, और चले आते हैं राष्ट्र निर्माण का राग अलापने! इन्हें किसने हक़ दिया है क़ानून को अपने हाथ में लेने का? समस्या है तो समाधान भी है, लेकिन ये किसी का अधिकार नही बनता कि वो किसी पर हाथ उठाए. बंदर की तरह उछल कूद करने से अच्छा है कि एक सभ्य इंसान की तरह, सभ्यता की राह पर चलकर भी हालातों को बदला जा सकता है!

मेरी समझ से मुद्दा ये है कि समाज में कुछ ग़लत हो रहा है, और उसमें कैसे बदलाव लाना है इस पर कोई बात नही हो रही. क्या एक ग़लत कदम को रोकने के लिए फिर दूसरे ग़लत कदम का उठाया जाना ही समस्या का समाधान है? जिन्हें इस बात का आभास है कि वो समाज़ को एक नयी सकारात्मक दिशा दे सकते हैं, अगर वे समस्या के समाधान पर पहल कर सकते हैं तो मैं उनके विचारों को आमंत्रित करती हूँ!

 
Note: Click here

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33 Responses to “पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या…!”

  1. sameer lal said

    संस्कृति की बोली मत लगाइए, बल्कि युग निर्माण में सकारात्मक भागीदारी निभाएँ.

    -बिल्कुल सही कहा.

  2. अरे, किन चिट्ठियों ने आपको इतना दुखी किया।

  3. रेवा जी आपकी टिप्पणी मिली जिसमें आपने मेरी टिप्पणी का जवाब दिया है। आप मुझे माफ कीजिये गा कि मैं आपकी टिप्पणी प्रकाशित नहीं कर रहा हूं। अच्छा होता कि आप उसे ई-मेल पर भेज देतीं। यदि मुझे आपकी ई-मेल मालुम होती तो मैं इसका कारण भी व्यक्तिगत तौर पर बता देता पर जब शायद उसे यहां भी प्रकाशित करना कहना उचित न होगा।

    आपने जिस प्रकरण का जिक्र किया है मैं स्वयं उससे से दुखी हूं। ज्लद ही उस पर कुछ लिखूंगा।

  4. Anurag Ranjan Singh said

    http://bhadas.blogspot.com/2009/02/blog-post_8049.html

    http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2009/02/pink-chaddi-campaign-women-liberation.html

    http://www.samaylive.com/news/brosis-beaten-up-by-bajrang-dal-activists/608632.html

    http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/02/cultures-of-all-lands-to-blow.html

    ज़रा इन लिक्स पर भी ध्यान दीजिए और अपनी प्रतिक्रिया को और प्रभावी बनाइए……!

  5. Anurag Ranjan Singh said

    http://sarathi.info/archives/1880

    http://masijeevi.blogspot.com/2009/02/blog-post_13.html

    http://vadsamvad.blogspot.com/2009/02/blog-post.html

    http://kuhasa.blogspot.com/2009/02/blog-post_13.html

    http://chauraha.wordpress.com/2009/02/12/%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%95-%E0%A4%9A%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%A2%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2/

    ज़रा इन लिक्स पर भी ध्यान दीजिए और अपनी प्रतिक्रिया को और प्रभावी बनाइए……!

  6. Shanta said

    What can I say about Neta? Today Neta word itself conveys all ideas. Let ask ourselve what we can do for the society. I myself can not allow pub culture. You can get the answer of this question, if you have read the talisman of Gandhiji written on the first page of every NCRT book.

    if there are people dying due to hunger, there common people will waste money on wine, then how we can blame a person taking gun in their hand.

    yes being a person of thought, I can not take the wrong path, do you think all persons have some thinking level or ask people going in pub, do they think.

  7. Nidhi said

    Old people!!
    i hav seen som hindi blogs.de bcame so frustrated wid following d so caled indian tradition.nw dey cnt see a way out so de r wrting wrst in an uncivlized manner.
    dis is d mentality.al i m sying is peple sud chnge deir attitude.

  8. Ranjeeta said

    “कलम में समाज को सशक्‍त बनाने की ताक़त होती है, कृपया राजनेताओं की तरह संस्कृति की बोली मत लगाइए, बल्कि युग निर्माण में सकारात्मक भागीदारी निभाएँ.”

    WELL WRITTEN.

    The available uncivilized pictures showing the scenes, and that is “civilized” and “cultured”???

    These peoplpe are extra burden on the whole civilized and well cultured society. They should better go and ask their mother that what they are doing is good or not.

  9. Nidhi said

    “शर्म नही आती इन राजनेताओं को अपना राजनैतिक उल्लू सीधा करने में! अपनी मातृ संस्कृति – सभ्यता की बोली लगाने में! अपनी ओछी महत्वकांक्षा की पूर्ति के लिए धर्म को हथियार बनाने में! देश भक्ति के नाम अपनी ग़लत शक्ति की मनमानी करने में! वेश्यावृति करने में, और अपने पुरुषत्व पर!”

    hume inke karname par lajja ati hai.inhe lajja nahi aati?ye kafir log apne clture ko vul ke women ko chalna sikhaenge?
    dis is culture de use to tlk fr india.dese peple sud b punished.

  10. Nidhi said

    i saw d links.hindi me likhte hen bakwas,aur ye bakwas photo v laga rakha hai.inhe v lajja nai ati kia?

  11. Kiran said

    @Hindi bloggers,

    It’s too bad to see such thing on blog. I can think of some other reasons why people write blogs in hindi. Please change the way of thinking, it’s never too late to change. Learning good manners will help your child act toward others with respect.

  12. Kiran said

    “शर्म नही आती इन राजनेताओं को अपना राजनैतिक उल्लू सीधा करने में! अपनी मातृ संस्कृति – सभ्यता की बोली लगाने में! अपनी ओछी महत्वकांक्षा की पूर्ति के लिए धर्म को हथियार बनाने में! देश भक्ति के नाम अपनी ग़लत शक्ति की मनमानी करने में! वेश्यावृति करने में, और अपने पुरुषत्व पर!”

    These politicians are educated for namesake but inside they are worse…ruling the country and making it worse.

  13. Anupam Jha said

    Disgusting!Going through some downright brain injury!!!

  14. Shanta said

    Today I read above mentioned blogs.. I am really confused what to comment on them..

    The way people are raging their voice against Ram Sene, if they had raise voice against poverty, lack of education, woman empowerment,people living on the verge of gun in North-East, Kashmir and many more issues.. people must have campaigned against pub, wine culture, dowry system, corruption etc.. and there would have no need of emergence of Ram Sene..

    I am not the supporter of Ram Sene.. but supporter of pub culture are also not doing any good for society.. if they seek freedom.. why country need Army.. why police will die for people.. let them have complete freedom and see how they have to face the attrocities of Pakistani, Bangladeshi and goons of our land and many more..

    and again if they seek freedom, why should I fall in such mess or discussion.. I will die for a well cultured woman.. why should I care the careless pub going people.. so no further reaction for this event..

    let us introspect ourselves what is good or bad in holistic way and teach those things to new generation so that the India of tomorrow will be a happier place to live for all.

  15. Anurag Ranjan Singh said

    नई तकनीक और उसकी उपलब्धियां समाज के निर्माण में कैसी और कितनी भूमिका निभा सकेंगी इस बात का निर्णय उन तकनीकों को आत्मसाथ करने वाले लोगों की मानसिकता पर ही पूरी तरह से निर्भर करता है| अगर मैं भारत देश के परिप्रेक्ष्य में तकनीक के अविर्भाव की बात करूँ तो इस सन्दर्भ में यहाँ के लोगों की मानसिकता का यह शैशव काल है, एक ऐसा समय जिसमें परिणाम का बोध किए बिना ही अपनी मनमानी करने की जड़ता का स्वाभाव उनकी कुंठा की ओर संकेत करता है| इस स्थिति और परिस्थिति में उम्र के अंतिम पड़ाव को पार कर रहे हमारे बुजुर्ग हों या हमारे युवा साथी दोनों ही अपरिपक्वता का ग्रास बनतें हैं| समाज के निर्माण में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले युवाओं और बुजुर्गों को ही आज़ सबसे ज्यादा सजग और सचेत होने की ज़रूरत है| इन्टरनेट के माध्यम से ब्लॉग पर शब्दों और तस्वीरों से नकारात्मक सोच और समझ को उकेरने वालों को यह ज़रूर सोचना पडेगा की एक सभ्य इंसान कहे जाने के नाते समाज के लिए आखिरकार उनकी क्या जिम्मेदारी बनती है? इन हालातों में ना ही वे अपने बच्चों को ठीक संस्कार दे सकेंगे और ना ही समाज के निर्माण में अपनी सकारात्मक भागीदारी|

  16. Amit said

    “ये संपत्ति ना उधार ली जा सकती है, ना ही दी जा सकती है. इसे तो अपने बुद्धि – विवेक से अर्जित किया जाता है, और यही परिपक्वता है समाज़ की, राष्ट्र की, व्यक्ति की, और पूरे विश्व की!”

    Well said Rewa.

    What are these hindi bloggers doing there in fact? They are making the environment dirty. These people have completely lost their minds.

  17. Nidhi said

    बड़ा हुआ तो क्या हुआ? जैसे पेड खजूर!
    पथिक को छाया नहीं, फल लगे अति दूर!! 😉 😛

  18. Anindita said

    एक झूट का अंजाम लाख झूट और एक ग़लत कदम का नातेजी लाख ग़लत कदमे– परन्तु अगर यदि कोई अपने किए पर पछताएँ और उन्हें अपनी गलती का अहेसास हो फिर एक क्यों सौ गलतियों को भी सुधरा जा सकता है. परन्तु सबसे पहले अपने आप को बदल न होगा . लेख बढ़िया है — ख्याल और भी नेक हालाँकि आज की परिस्थिति में ऐसा ख्याल पगत कारने में भी डर लगता है — पता नही किसी कब क्या बुरा लग जाए?

  19. Tarun said

    रेवा सही कह रही हो, हर बात को सलीके से कहना तो आना ही चाहिये, ऊपर के कमेंट पढ़कर लगता है ज्यादा पब्लिक ऐसे ही हिंदी ब्लोगस में जाती है वरना कई अच्छे हिंदी ब्लोगस भी हैं। बात फिर वहीं आकर अटक जाती है – देखने के नजरिये पर।

  20. Devesh said

    वो ये कैसे भूल जाते हैं कि उनकी पीढ़ियाँ भी कल उनका ब्लॉग पढ़ेंगी?

    well said , aapne bilkul sahi kaha , yah bog aane wale pidiya padhegi aur dekhe gi ki unke purvajo ne kya yogdan diya hai ya kya kiya hai.

    Regards

  21. नमस्ते अनंदिता दीदी,

    बहुत अच्छा लगा आपका कमेंट पढ़! दीदी सही कहा है आपने सबसे पहले खुद को बदलना चाहिए, जो आज के समय में सबसे कठिन काम है. क्योंकि इसके लिए खुद के अन्दर झाँकना पड़ता है, और खुद के साथ ही पहले संघर्ष करना पड़ता है. इंसान अपनी ग़लत मानसिकता के खिलाफ जाना पसन्द नही करता है, किंतु खुद को सही साबित करने के चक्कर में मान्यताओं में घिरा दूसरों पर कटाक्ष करता रहता है, जो उन्हे भी अन्दर से अस्वभाविक लगता है और पसन्द नही होता है!

    I wish to read some more from you.

    शुक्रिया!

  22. Anurag Ranjan Singh said

    दूँढना हल शेष! अभी यारों

    लड़ना है शेष! अभी यारों
    बढ़ना है शेष! अभी यारों

    बेइमानों को आज़ादी है,
    चाटुकारों के घर चाँदी है
    बदकिश्मत मिहनत-कश जनता,
    जनता के घर बर्बादी है
    गढ़ना है देश! अभी यारों
    बढ़ना है शेष! अभी यारों

    डंडेवालों का झंडा है,
    धनवालों का हथकंडा है
    मजलूमों को है कफ़न नहीं,
    जीवन जीना ही फंदा है
    मढ़ना है वेश! अभी यारों
    बढ़ना है शेष! अभी यारों

    सब दो नंबर का भाषण है,
    झूठा-झूठा आश्वासन है
    मजबूर निगाहों में आँसू,
    सोना-सा महँगा राशन है
    जीना है शेष! अभी यारों
    लड़ना है शेष! अभी यारों

    छिना-झपटी है कुर्सी की,
    सब खेल है खूनी कुर्सी की
    भाई-भाई का कत्ल करे,
    यह “फूट” करिश्मा कुर्सी की
    बनना है एक! अभी यारों
    बढ़ना है शेष! अभी यारों

    सत्ता की अदला-बदली है,
    पर नीति बड़ी ही दोगली है
    हालत बद-से, बदत्तर ही है,
    जनता भी खूब ही पगली है
    दूँढना हल शेष! अभी यारों
    बढ़ना है शेष! अभी यारों

  23. bahoot khoob…………in netao ki marji ke bina ek patta bhi nahi hilta…..apni marji se sab kanoon banta hai……………

  24. rohit said

    Hi Riwa

    Ek saath sari post pad dali hai……. Muze Laga Kiyon Pada, Sare Blog ko…. Jara si baat per blog pe blog likh diye logo ne…. Laga Kisi Jammne ke Hiindi Writers ki fight ab Blog per aa gai hai, Jo jara se pink chandi ke naam per yaa pab ke naam per Indian culture ko Khatara jaan lete hai. kai kaam hai, useper dhyan de to behtar hoga……

    rohit

  25. rohit said

    or kuch nahi
    to riwa ki kavita pad le…Rote Rote Haath Badya… shyad kuch kaam yaad aa hi jaye logo ko

  26. rohit said

    rewa
    kaha gai?????????????????????
    i think more then 20 days ,, is she there?

  27. Nidhi said

    r u alive? whre hav u been? WRITE SOMETHING….v miss u!! 😦

  28. anon said

    she is alive seriously! thank gaaaaaad!getting ready now to hit the floor!! happy journey!

  29. होली की हार्दिक शुभकामनाएँ .

  30. mehek said

    aapko bhi holi ki bahut badhai rews:)

  31. rohit said

    everthing is ok. holi gai….ab aage badna hai ki nahi. rewa kidhar gai.
    rohit

  32. To inculcate values is just like planting a sapling,watering it and finally taking it to a size of tree—now friends the state of protecting culture[sanskriti] is quite akin to our dwindling forest wealth.sorry we all know about deforestation,greenhouse effect,pollution,etc. but how many of us dare plant & guard a tree? we only feel sad about a death of green tree! in the same way tracing our religous scriptures and travelling to modern world atleast 90 simple values are enlisted and are also authenticated by apex educational body like NCERT! now need of the hour is to assimilate,accomodate and propogate these values by our during our routined day to day activities! a checklist of these values are either can be made avaailable our can be decided by our consciences’vedict.So lets resolve to propogate atleast one value by our deeds! I honour your pain to react to happenings cited by you, butwe have no time to show anguish to such things,need of the hour is to plan strategise and attack on the target hitting straight in the bull’s eye!
    friends even an evil wicked neta has a hero in his mind whom he apes in his deeds—if this hero is evil you will find clones of evil in the society only! a typical human psychology is to attain acceptance,success ,name,fame, wealth etc. at any cost
    staking those ideal behaviours which cease to cater him success.
    So now I raise an appeal to all that convert your anguish into action[well I have long ago started] and bring a paradigm shift
    in the standards of hero.I pity to teach and propogate gandhiji’s teaching a munnabhai character was created to realise his teachings to society!if munna bhai is a hero to pseudo intellectuals like me dont you think is a character who is already an epitome of all those activities we hate/dislike–need of the hour is create those heros again who spread values.I feel it is not difficult only all of us must trickfully break our latency and become social mobilisers and of course not the martyrs.I have an action plan ready for every word I have written
    Best of luck and Regards
    Dr Vishwas saxena

  33. यायावर said

    जब भी इस लेख को पढ़ता हूँ….गुज़रा वक़्त जी उठता है| कितना अनूठा सारगर्भित संस्मरण है…शब्दों में पिरोना भी संभव नहीं| आपकी लेखन क्षमता प्रवाहमयी रहे अपनी अखंडता के विशेषण का वरण कर…यही मेरी कामना है|

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