Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

चुपके से रोता है!

Posted by Rewa Smriti on November 5, 2008

वक़्त भागता है
ये सोच अक्सर
सब भागते हैं
ख्वाबों ख़यालों को
अपने साथ लिए!

जहाँ भी देखो
होड़ मची है
मंज़िल पाने की
या, ज़िंदगी से आगे
निकलने के लिए!

किसे है ख़बर
भाग दौड़ के
इस सफ़र में
यहाँ हर कदम पर
कुछ खोता हुआ
नज़र आता है!

और, कभी कभी
रात के अंधेरे
गहरे सन्नाटे में
ये दिल भी
एक ओर सिरहाने में
सिर रखकर
चुपके से रोता है!

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15 Responses to “चुपके से रोता है!”

  1. Dr Anurag said

    सोचता है भाग के पकड़ लेगा वक़्त है मगर ठहरता नही…….हर आदमी के जीवन की यही कहानी है

  2. और, कभी कभी
    रात के अंधेरे
    गहरे सन्नाटे में
    ये दिल भी
    एक ओर सिरहाने में
    सिर रखकर
    चुपके से रोता है!

    waah kya baat hai….khoobsurat

  3. ranjana said

    waah ! sach kaha,sundar kaha.

  4. mehek said

    किसे है ख़बर
    भाग दौड़ के
    इस सफ़र में
    यहाँ हर कदम पर
    कुछ खोता हुआ
    नज़र आता है!

    bahut sahi kaha rews,waqtke piche hum bhagte hai aur kuch khwahishe raat mein aason ban nikalti hai,yahi jeevan hai.

    aap hame hamesha ek geet sunati hai,aaj aapke liye ye gana

    ye jeevan hai,es jeevan ka yahi hai ,yahi hai rang roop,thodi khushiyan,thode gum hai,kabhi chav kahi dhoop.

  5. rohit said

    Rewa
    Word nahi hai…kahne ko kuch
    ये दिल भी
    एक ओर सिरहाने में
    सिर रखकर
    चुपके से रोता है!

    I am looking my सिरहाने, Really My Dil is there. Dil सिर रखकर
    चुपके से ….है!
    Kafi Kuch Kah Dala hai REWA
    Last Line Punch Line.
    Subhan Allaha!!!!
    Rohit

  6. Amit said

    और, कभी कभी
    रात के अंधेरे
    गहरे सन्नाटे में
    ये दिल भी
    एक ओर सिरहाने में
    सिर रखकर
    चुपके से रोता है!

    A very beautiful poem written straight from the heart. You have a very good way with words.

  7. Nidhi said

    किसे है ख़बर
    भाग दौड़ के
    इस सफ़र में
    यहाँ हर कदम पर
    कुछ खोता हुआ
    नज़र आता है!

    और, कभी कभी
    रात के अंधेरे
    गहरे सन्नाटे में
    ये दिल भी
    एक ओर सिरहाने में
    सिर रखकर
    चुपके से रोता है!

    A beautiful flow. u knw ur poem is one of d most perfect poems written on todays fast life.its so beautiful nd diffrent nd full of feelings dat i lov to read.

  8. Nidhi said

    chupkey chupkey raat din aanshu bahana yaad hai 🙂

  9. Ruchi said

    us dil ko maine raat ke andhere me chupke se rota dekha hai
    magar tumse milkar , usse maine muskurate bhi dekha hai
    is bhaag daud ki duniya me , do roti ki chahaat me,
    pardes ki dooriyon me usse khote bhi dekha hai

  10. Kiran said

    किसे है ख़बर
    भाग दौड़ के
    इस सफ़र में
    यहाँ हर कदम पर
    कुछ खोता हुआ
    नज़र आता है!

    Awesome poem! I am forced to think of what is important in life – home/family and knowing where I am and why.

  11. खुब जायज हैं ये पंक्तियाँ । क्या पाने के लिए क्या खोयें – किस हँसी के लिए किस आँसु को गले लगाएँ – बहुत बड़ा सवाल है । शायद दोनों में संतुलन बहुत कम ही रख पाते हैं । कहीं-कहीं जिन्दगी कुछ चीजों के लिए के लिए बहुत बड़ी कीमत माँग लेती है ।

    हाँ बहुतेरे ऐसे है जो सिरहाने से ऐसे ही बातें करते हैं – यही शायद जिंदगी है..

  12. bhootnath said

    चुपके से वो रोता तो है…..रोते-रोते सपने भी बोता है……अपने आप को संभालता भी जाता है…..हर पल ख़ुद को कहीं खोता है….अक्सर वो अकेले में …तन्हाई को आंसुओं से भिगोता है….किसी को भूल जाने के लिए….यादों को नश्तर चुभोता है…..अभी तो वो हंस रहा था…और अब रोता है…..अब तो ऐसा लगने लगा है कि …. यादें समंदर भरा एक लोटा है…..अपने आप को भूल जाने के लिए “गाफिल”….खुदा में ख़ुद को डुबोता है…..

  13. Achchi rachna. Badhai.

    guptasandhya.blogspot.com

  14. amu said

    Chura lo tum khushi ke pal,
    mukaddar ke khajane se,
    bhala kab dur hote hain,
    ye gam aansu bahane se.

  15. किसे है ख़बर
    भाग दौड़ के
    इस सफ़र में
    यहाँ हर कदम पर
    कुछ खोता हुआ
    नज़र आता है!

    हाँ कुछ ऐसा लगता है….
    कोई तिमिर में खोता सा…
    मुझसे दूर….
    भागने की कोशिस में…
    ऐसा लगता है..

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