Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

हे ईश्वर या अल्लाह!

Posted by Rewa Smriti on October 2, 2008

कल रात करीब 9 बजे बगल में रहने वाली एक आंटी सेवई देने आई. मैने उनसे पूछा, “आंटी ईद आज था या कल है”. उन्होने कहा कि “कल है बेटा, आप सुबह – सुबह ऑफिस चले जाओगी इसलिए अभी दे रही हूँ!” यह सुनकर बहुत खुशी हुई कि आंटी को इतना ख़याल है. फिर उनसे कही कि ‘मेरा नवरात्रि का फासटिंग चल रहा है, मैं खा नही पाऊँगी’. बोलते हुए थोड़ा बुरा भी लग रहा था. लेकिन शायद उन्हे लगा कि आज उपवास है, इसलिए वो कहने लगीं कि “अभी फ़्रीज़ में रख दो, कल खा लेना”. तब मैं उन्हें बताई कि ‘मैं नौ दिन अभी अन्न नही खाऊंगी’ तो आंटी बोल पड़ी ‘उपवास जब भी समाप्त होगा मुझे बताना, मैं आपके लिए स्पेशल बिरयानी बनाऊँगी’. वाह! सच में दिल इतना सुन ही खुश हो गया. सोच रही हूँ, क्या वाक़ई बड़े शहरों में भी हमारे पड़ोसियों को इतना ख़याल रहता है….!?

आज ईद है और दिल से बस यही दुआ निकल रही है कि सभी को ईद मुबारक हो. ऑफिस पहुँचकर सबसे पहले ज़ुबैर भैया को फोन की और ईद मुबारकबाद दिया. उन्होने बताया कि वो कल रात को ही दिल्ली पहुँचे हें, फिर मैने सोचा कि भैया रोमिंग में हें तो बाद में बात कर लेंगे. मैं बंद करना चाह रही थी लेकिन वो करने ही नही दिए और हम दोनो ने काफ़ी देर बात की. लेकिन इस बार उनसे भी बात करके लगा कि वो बहुत खुश नही हें. ख़ैर इस बार ना तो ईद और ना ही दुर्गा पूजा की खुशी झलक रही है. वैसे भी कोई खुशी खुशी मनाए भी कैसे, कहीं बाढ़ तो कहीं ब्लास्ट लोगों का सुख चैन छीन लिया है!

सुबह 5 बजे जब मैं पूजा कर रही थी तो अचानक बिहार में आए बाढ़ के चलचित्र मेरे सामने आने लगा. एक पल के लिए मन विचलित हो उठा, और कुछ देर के लिए मौन हो गयी. फिर पूजा समाप्त कर ऑफिस के लिए चल दी. दिमाग़ में ये चल रहा था कि न्यूज़ तो सुनी नही हूँ, और इस बात का भय लग रहा था कि फिर कहीं ब्लास्ट ना हुआ हो.

जब ऑफिस पहुँची, न्यूज़ पेपर पढ़ी तो पता चला कि जोधपुर और अगरतल्ला में ब्लास्ट हुआ है! मुझे याद आ गयी दिल्ली में हुए बम विस्फोट की घटना, और मैं सहम सी गयी. उस दिन जब दिल्ली में ब्लास्ट हुआ था तो मैं अपने दोनो बहनों के साथ लाजपत नगर मार्केट में शॉपिंग कर रही थी. अचानक भाई ने फोन किया और ब्लास्ट के बारे में बताया. जब हमें पता चला तो हम वहाँ से निकल पड़े, पर हमे ऑटो नही मिल रहा था, और करीब एक घंटे के बाद ऑटो मिला. इधर घर वालों को पता चल गया कि हम मार्केट गये हें, सभी डरे -डरे से हमें फोन कर रहे थे. कितना भयावह होता होगा वो दृश्य जब लोग पल भर में अपनी जान गँवा देते हें, सोचती हूँ तो रूह काँप जाती है. अब तो हर रात दिल एक डर लिए सोता है कि ना जाने कल सुबह का आलम क्या होगा!

सत्य और अहिंसा के पुजारी गाँधी के देश में आज चारो ओर आख़िर हिंसा क्यूँ ??

हमसे ना देखा जाए बर्बादियों का समा
उजड़ी हुई बनती में यह तड़प रहे इंसान

नन्हे जिस्मों के टुकड़े लिए खड़ी है एक माँ
बारूद के धुएँ में तू ही बोल जाए कहाँ…??

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11 Responses to “हे ईश्वर या अल्लाह!”

  1. डर से पार पाने का सीधा तरीका है समाज की मजबूती
    एक दुसरे को समझना, खुशियों के साथ दर्द भी बाटना
    नवरात्रि और ईद का साथ साथ आना हमें मौका देता है की हम साझे दरी की परम्परा आगे
    ले जाएँ स्पेशल बिरयानी में सभी का हिस्सा बनता है याद रखना
    नवरात्रि व्रत कई लोगो का चल रहा है

  2. @रौशन

    तुमने सही कहा, ईद और साथ में नवरात्रि हम सबको अपनी ज़मीं याद करने बोल रही है जो हम भूल रहे हें और चारो ओर हिंसा फैला रहे हें. ये हमे प्यार ओर शांति से रहने के लिए संकेत कर रही है.

    हाँ जी, हमें मालूम है तुम भी नवरात्रि का उपवास कर रहे हो. इसलिए तुम्हारा तो हिस्सा पक्का बनता है स्पेशल बिरयानी में. वरना ये बिरयानी मेरे लिए आफ़त ही लाएगी! 🙂

  3. Dr Anurag said

    जी हाँ सब सहमे हुए ओर डरे हुए है ,उम्मीद है ये धुंध भी जल्दी छट जायेगी

  4. mehek said

    rews aapko idd aur navratri ki badhai aur shayad ahi zindagi hai kahi khushikahi gum

  5. rohit said

    HI Rewa
    Dili me thi. or who bhi blast ke din. kher me bhi bacha baal baal, Kai dost or bhi they, sifr kuch secondo se bache hum sab. Doctor dosto ki ek team (8 doc ) bhi bachi. Is baar dili me khof jayda ho gaya hai, Karan hai blast ke pichye indina logo ka hona.(first time large scale per effect hua hai. Log Temple or market me nazar nahi aa rahe. 2005 blast ka empact chand dino me gayeb ho gaya tha.) log pareshaan Hai. Vishwas ki kadia tutati lag rahi hai. Koi fact per dhyan nahi de raha. Delhi me hi kai ilako me policewale ekele jate darete hai. Phir bhi Ummiede kayam hai, Hamara kaam dimaag ke saath saath dil ko kabboo me rakh ker, Bharat ko ek baar phir bulandi per pahuchaana.

    Rohit

  6. रेवा जी…..

    मैं भी ईद और दिवाली खूब मज़े से मनाता हूँ …….ईद के मौके पर मैं भी दोस्तों के घर गया… गले मिला ….सेवई खाया ……और हाँ अपने हेड डॉ. ए. बरकात के घर जाकर लगा कुछ लोगों की खोटी सोच ने धार्मिक दीवारें खडा कर रखी है….
    आयें इस दिवार को तोड़ डालें…..

  7. Nidhi said

    som cal him ishwar,som cal him Allah,some call him Jesus,nd som call God bt v al hav to understand that thre is only nd only GOD who made us fr: to love nd to be loved.

    Ishwar Allah Tere Naam, Sab Ko Sanmati De Bhagwaan,
    Sab Ko Sanmati De Bhagwaan, Sara Jag Teri Santaan,
    Sara Jag Teri Santaan..Sara Jag Teri Santaan..

    Is Dharati Par Basane Wale, Sab Hai Teri God Ke Paale,
    Sab Hai Teri God Ke Paale, Koi Neech Na Koi Mahaan,
    Sab Ko Sanmati De Bhagwaan, Sab Ko Sanmati De Bhagwaan,
    Sara Jag Teri Santaan..Sara Jag Teri Santaan..

    Naatho Nasalon Ke Bataware, Jhoot Kahaye Tere Dwaare,
    Jhoot Kahaye Tere Dwaare, Tere Liye Sab Ek Samaan,
    Sab Ko Sanmati De Bhagwaan, Sab Ko Sanmati De Bhagwaan,
    Sara Jag Teri Santaan..Sara Jag Teri Santaan..

    Janam Ka Koyi Mol Nahin Hai, Janam Manush Kaa Tol Nahin Hai,
    Janam Manush Kaa Tol Nahin Hai, Karam Se Hai Sab Ki Pehechaan,
    Sab Ko Sanmati De Bhagwaan,

    Ishwar Allah Tere Naam, Sab Ko Sanmati De Bhagwaan,
    Sab Ko Sanmati De Bhagwaan, Sara Jag Teri Santaan,
    Sara Jag Teri Santaan..Sara Jag Teri Santaan..

  8. Nidhi said

    biryani akeli mat khana kuchh delhi parcel kar dena.

  9. shubh said

    Religions have caused more trouble then benefit. Humanity cannot sustain too many religions no matter how many times you recite Allah and Ishwar are same. At some point of time all these religions should converge into single religion of love – Humanity. Otherwise, we would never have peace like so far.

  10. Hussain said

    aakhir hum sab innsaan hi toe hain 🙂 jo bhi sahi aur seedhi soch rakhta ho usse jindagi ka itna toe yehasaas rehata, aur ek doosre ke kaam mein aane ki koshish bhi karta hain.

    But the pity is that the anti social elements belonging to any of the community/religion have changed the face of the Indian diverse cultural harmony.

    2 years back during Ramzan I had been to Charminar area in Hyderabad with a joyful mood in the cheerful crowd, was shopping for my maiden onsite assignment so missed the last year Ramzan here in India. This year again I visited Charminar during Ramzan but not with the same Joy, there was discomfort and uneasiness as if I was in a strange land.

    It pains to witness all such ill human things happening in common man’s society.

    Inshallah, lets pray for the peace to prevail every where …

  11. Amu said

    han di ummid pe to duniya kayam hai, aur shyad isi ummid ke sahare hum ji rahe hain. par ye jina bhi koi jina hai, na aaj ki khabar na kal ka bharosa.pata kab kaha kya ho jaye, sach sabhi sahme sahme se rahte hain.

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