Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

मंज़िल-ए-इश्क़ अर्ज़ है…!

Posted by Rewa Smriti on February 12, 2008

गर देखने का अंदाज़ बदलो तो, निगाह-ए-नाज़ मुमताज़ नज़र आएगी,
ताज़ से निगाहें फेरो तो, दिल में दस्तक देती वो सरताज़ नज़र आएगी!

मुद्दतों बाद बे-नक़ाब चाँद आज निकला है मोहब्बत-ए-सफ़र में,
जोश-ए-जुनून में ना कर दे फिर से जान-निसार महबूब-ए-हमसफ़र पर!

खुश मिज़ाज़ मौसम का काफ़िला चल पड़ा है मंज़िल-ए-इश्क़ पर,
महक-ए-गुलशन की छाने लगी है हर राह-गुज़र के दिल-ओ-दिमाग़ पर!

क्यूँ ढूँढते हो उसे शाम-ओ-शहर दीवाना बन रफ़्ता-रफ़्ता गलियों में, 
दिल का दरवाज़ा खोल, धड़कन पर बैठी वो जान-ए-जिगर नज़र आएगी!

*******************************************

Advertisements

29 Responses to “मंज़िल-ए-इश्क़ अर्ज़ है…!”

  1. mehhekk said

    aaha,wah wah dil kush kar diya rewa tum ne,bahutgazab ki shayarana gazal likhe hai,isa laga,tajmahal ke galiyon ki safar par nikli hun,afarin.kya ek ek alfaz ke motiyon ki ladi banayi hai,ye mala hum pehnkar hi jayengi aaj.
    खुश मिज़ाज़ मौसम का काफ़िला चल पड़ा है मंज़िल-ए-इश्क़ पर,
    महक-ए-गुलशन की छाने लगी है हर राह-गुज़र के दिल-ओ-दिमाग़ पर!

    ye sher tarif se bhi badhkar hai,no words for its tariff ,its to awesome.

  2. a nice poetic stanza…

  3. Dear Mehek, I must thankful to you that your name inspired me to write this above sher which you liked most. Thanks for your lovely and nice comment.

    Hi Vinay, thanks a lot for appreciating it.

  4. Nidhi said

    क्यूँ ढूँढते हो उसे शाम-ओ-शहर दीवाना बन रफ़्ता-रफ़्ता गलियों में,
    दिल का दरवाज़ा खोल, धड़कन पर बैठी वो जान-ए-जिगर नज़र आएगी!

    Subhan Allah! wah wah kya shayari hai.. ise kahte hain ATI SUNDER.

  5. Nisha said

    Hey it’s beaut’l.watta verse! After a long time I came through smthing in our script on the internet. I’s just brows’n a frnd’s blog n got y’r blog there. can you tell me how You write in Our script on internet? Here We don get softwares sp’ly for hindi or smthing.

  6. Shubh said

    Indeed a great sher 🙂

  7. Dino said

    really very nice poem…….keep it up…

    Ye aaine se akele main guftagu kya hai
    Jo main nahin to phir ye tere rubaru kya hai

    Isi umeed pe kaati hai zindagi maine
    kaash wo puchte mujhse ki aarzoo kya hai…..

  8. Dear Nidhi…kya baat hai tumhe kabhi mera sher nahle per dahla to kabhi ati sunder lagta hai…ab aage na jane kya lagne wala hai…By the way shukriya for your lovely words.

    Dear Nisha, 1st of all welcome you at my blog world and thanks alot for liking it. If I am not wrong you are the same Nisha who belongs to navodaya. 🙂 Hey I am using http://www.quillpad.com and converting my poem from english to hindi script. You can try this as its very easy. Also some of words you may not get correct so for that you need to adjust accordingly to get correct words. You try, and let me know if you find any problem, will try to help you.

    Hi Shubh, bahut bahut shukriya.

  9. Amit said

    खुश मिज़ाज़ मौसम का काफ़िला चल पड़ा है मंज़िल-ए-इश्क़ पर,
    महक-ए-गुलशन की छाने लगी है हर राह-गुज़र के दिल-ओ-दिमाग़ पर!

    Cooooollll.
    nice sher. happy valentine day Rewa.

  10. निशा said

    आपने सही पहचाना हमे। आप का ब्लॉग पढने के बाद मैं देर तक परेशान रही हिन्दी लिखने को लेकर। कुछ दोस्तों की कमी खली जो कोई भी चीज कहीं सेभी खोज कर निकल देते थे। फिलहाल मैंने उनका ही तरीका अपनाया और खोजती रही। अभी आपका जवाब पढने के थोड़ा पहले भेजे ने आखिर क्लिक कर ही दिया ब्लॉगर पर ये फीचर मौजूद है। फ़िर मैने खुश होकर आपको लिखने को सोचा तो पाया कि और भी जगहें हैं। क्विल पैड के बारे मे जानकारी देने का शुक्रिया। ये बिल्कुल नई खोज सा है मेरे लिए अपने अपनों को अपनी भाषा मे लिखने का संतोष ही कुछ और होता है।
    याद है नवोदय डॉट नेट पर भोजन मंत्र वाला कांटेस्ट? तभी मुझे महसूस हुआ था कि काश इंटर नेट पर हिन्दी सम्भव होती। एक दोस्त ने एक सॉफ्टवेयर भेजा था मुझे पर वो इतना प्रभावशाली नही था।
    इस बीच मैने आपकी कई कवितायें और गजलें पढीं बहुत अच्छा लिख रहीं हैं आप । ऐसे ही लिखती रहिएगा।

  11. बहुत खुब ! शेर-शायरी के नियम को मानकर ये लिखी गयी है या नही – यह तो पता नहीं , पर अल्फाज काफी अच्छे हैं ।

  12. Amit, Thanx a lot and happy V’day to you too.

    निशा, hmmm…सही कहा तुमने अपने भाषा में लिखने का अंदाज़ और आनंद ही कुछ और है. हाँ जी मुझे याद है नवोदय डॉट नेट पर भोजन मंत्र वाला कांटेस्ट, और यह भी याद है कि आपने जीता था उस कांटेस्ट में. और अभी तक आपके पास वो प्राइज़ नही पहुँच पाया है. बहुत जल्दी ही आपके पास वो पहुँच जाएगा. आप कई दिनों से ऑनलाइन नही आई थी तो हमें आपका अड्रेस नही मिल पाया है. आप कृपया कर नवोदय डॉट नेट पर मुझे अपना अड्रेस भेज दें. आपको मेरी कवितायें और गजलें अच्छी लगी इसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

    प्रेम सर, आपको मेरी अल्फ़ाज़ अच्छी लगी इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

  13. Hi Dino, wah wah wah kya sher likha hai…and bahut bahut dhanyawad for liking my poem. In btwn tumhara aaj ka din to achha hi guzra hoga. 😉

    Kisi shayar ne likha hai…

    जब दिल ने हमसे किए सवाल,
    तो हम ख़ुद मुस्कुराकर चल दिए. 🙂

  14. tanu said

    Di aapki shiyari ka kya kehna…
    i m speechless…
    WONDERFUL!!
    frm my side on this valentine’s day….

    कई जगह , कई बार , कई तरह से
    सुना है ,देखा है और महसूस किया है
    बदनाम होते हुए इस लफ्ज को ;
    कुछ दुखते हुए दिलों ने ,
    कुछ टूटे हुए सपनों ने ,
    इसे एक नया ही रूप दे डाला है |
    प्यार कोई कोई आवाज़ नहीं
    ये तो एक खामोशी भरा एहसास है |
    प्यार कभी मरता कभी ख़त्म नहीं होता ,
    ये तो हर कण,हर मन में रचता बसता
    हर रिश्ते की वजह, हर सांस का आधार है |
    लोग इसे कुछ भी कहे या कोई भी नाम दे डाले
    प्यार तो बस प्यार है और ये भी सच है
    जैसा भी हो…जहाँ भी हो …
    प्यार तो बस प्यार ही फैलाएगा |

    tanu

  15. Dear Tanu, Happy V’day to you too. Thank you so much for your lovely words. Now I am speechless after getting valentine gift from you. Your poem is very nice and its reminding a song from the movie khamoshi. I liked it very much.

    प्यार कोई भूल नहीं, प्यार आवाज नहीं,
    एक खामोशी है, सुनती है कहा करती है।
    न ये झुकती है न रूकती है न ठहरी है कहीं,
    नूर की बूंद है सदियों से बहा करती है।
    सिर्फ अहसास है ये, रूह से महसूस करो,
    प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो!

    lots of luv to you.

  16. Ek Ajnabi said

    गर देखने का अंदाज़ बदलो तो, निगाह-ए-नाज़ मुमताज़ नज़र आएगी,
    ताज़ से निगाहें फेरो तो, दिल में दस्तक देती वो सरताज़ नज़र आएगी!

    मुद्दतों बाद बे-नक़ाब चाँद आज निकला है मोहब्बत-ए-सफ़र में,
    जोश-ए-जुनून में ना कर दे फिर से जान-निसार महबूब-ए-हमसफ़र पर!

    खुश मिज़ाज़ मौसम का काफ़िला चल पड़ा है मंज़िल-ए-इश्क़ पर,
    महक-ए-गुलशन की छाने लगी है हर राह-गुज़र के दिल-ओ-दिमाग़ पर!

    क्यूँ ढूँढते हो उसे शाम-ओ-शहर दीवाना बन रफ़्ता-रफ़्ता गलियों में,
    दिल का दरवाज़ा खोल, धड़कन पर बैठी वो जान-ए-जिगर नज़र आएगी!

    waah waah bahut khuuub…

    Har kadam pe dhoke milte rahege..
    par fiza me phool phir bhi khilte rahege..
    yeh haqeeqat hai log aksar badal jate hai
    par phir bhi anjaano se dil milte rehege..!!

    Ek Ajnabi

  17. Juneli said

    hmmmmm

    A good try for ghazal.

    If you take my saying as a constructive comment then her are my suggestions:

    If you try to write the sher keeping “radif” and “Kafiya” in mind then there is no doubt it will turn out a beautiful ghazal.

    I hope you don’t mind, if I say a few buch of shers don’t make a poem ghazal. It has a basic rule like we have in our poems (Hindi & Nepali) such as Chhand.

    I also love to write but mine too are not a ghazal in real sense as I even can’t follow the rules especially beher (meter) which is just like chhand in Hindi Poems.

    But if I take it as a poem then I want to say: aap ki manzil-e-ishq bahut hi umda ban pada hai kyonki Dil, Chaand, Gulsan aur Taj sab kuch hai yani ishq-e-janoon. 😀

    Keep it up.

  18. Juneli said

    I came after long…..

    Hopefully you won’t say aai toh bhi…… 😛 😉

    Lots of stuff to catch. Will do slowly and steadily as we have the story of Kachuye aur Khargosh 😛

  19. वह मारा पापड़ वाले को, अगर आप साथ दें तो क्या नहीं हो सकता है! आपको सभी को यह जानकर बेहद ख़ुशी होगी कि जिसने मेरा चिट्ठा चुराया था, वर्डप्रेस ने उसका अकाउंट प्रकानाधिकार नियमों के अंर्तगत बंद कर दिया है| आप सभी का तहे-दिल से धन्यवाद कि आपने साथ देकर चिट्ठा चोरों को मारने में मदद की| अब समय आ गया है कि चिट्ठा चोरों पर लगाम कसी जाये तो क्यों न एक वेबलॉग लॉच करें जो ब्लॉग लेखकों को न्याय दिला सके| नीचे बलॉग का नाम दिया जा रहा है, कृपया एक का चुनाव करें:

    १. वह मारा पापड़ वाले को
    २. साथी हाथ बँटाना रे
    ३. चोरों की ख़बर
    ४. कॉट रेड हेंडेड
    ५. असली नक़ली
    ६. हम एक जुट

  20. Hey Juneli, criticism and suggestions are always welcome on my blog. I would never mind for that. I am glad that you have passed a suggestion for me. I am thankful to you for same and also would like to get more suggestions from you in future too. Plz keep suggesting me so that I can improve my writing. Waise aapke isq-e-zanoon ko dekh yeh dil maange more suggestions from you!

    Hmmm…main to baar baar pukarungi ‘aa bhi jaa….!’ 🙂

    Vinayji, thora sochne ka time dijiye…Mehek se bhi discuss kar lun fir achha sa choose karti hun or aapko batati hun. 🙂

    rgds.

  21. Anupam Jha said

    I need to pour my body from water ,melted from a big ice cube in the first week of jan especially in delhi to avoid ur shayris…actually i donot feel these normally,but last line is quite eye blinking !! Achha leekh ti hoo…

  22. Hi Anupam,

    Welcome you on my blog. However, I really couldn’t undestand what you meant to say in your comment.

    rgds.

  23. Anupam Jha said

    mera matlab ye tha,ki ur shayaris r quite good.excellent.i said the same in the last comment,its not easy to avoid ur shayaris,abb toh samajh main agaya hoga.

  24. @Anupam,

    Hmmm….haanji ab achhe se samajh mein aa gaya. Aisa hai, aapka comment thora confuse kar diya tha to sochi kyun na confusion clear kar liya jaye. Bahut bahut Shukriya jo aapko meri shayaris pasand aati hai…..also thanx alot for your comment! keep visiting.

    rgds

  25. Jitender Singh said

    unki taraf se koi lafz nehi aaye hum intzaar karte reh gaye
    sab khairiyat to hai wahaan hum ye sochte hi reh gaye
    kehi bezubaan ho dubak gaye wo jinhen hum takte reh gaye
    hausla buland keejiye huzur jaise hum haste-2 sitam seh gaye
    aur sitam na karo chup reh kar ki hum aap ke ho kar reh gaye
    sun-na na pade kehin,dil ke armaan aansuon mein beh gaye!

  26. Tanu Shree said

    wah wah kya baat hai Jitender ji..Arre itni sundar panktiyaan agar aap comments me dalenge to fir to log rewa di ki lines chod ke aapki hi padhne lagenge…. 😉

  27. vishal said

    गर देखने का अंदाज़ बदलो तो, निगाह-ए-नाज़ मुमताज़ नज़र आएगी,
    ताज़ से निगाहें फेरो तो, दिल में दस्तक देती वो सरताज़ नज़र आएगी!

    मुद्दतों बाद बे-नक़ाब चाँद आज निकला है मोहब्बत-ए-सफ़र में,
    जोश-ए-जुनून में ना कर दे फिर से जान-निसार महबूब-ए-हमसफ़र पर!

    खुश मिज़ाज़ मौसम का काफ़िला चल पड़ा है मंज़िल-ए-इश्क़ पर,
    महक-ए-गुलशन की छाने लगी है हर राह-गुज़र के दिल-ओ-दिमाग़ पर!

    क्यूँ ढूँढते हो उसे शाम-ओ-शहर दीवाना बन रफ़्ता-रफ़्ता गलियों में,
    दिल का दरवाज़ा खोल, धड़कन पर बैठी वो जान-ए-जिगर नज़र आएगी!

  28. Nidhi said

    Ye aaine se akele main guftagu kya hai
    jo main nahin to phir ye tere rubaru kya hai

    chore ki hai;)

  29. Dr Vishwas Saxena said

    Dear author
    The message I could receive from your beutifully ornamented poem is that If we love god we dont need to rave for him as he resides in our heart only—–!fantastic feelings It remind me of ‘kalandars’ of suffi movement you know!they use to consider god as their beloved and use to get tranced in devotion–20 years ago I wrote a poem on these lines only I shall mail it to reinforce your views congrats for such a top level philosophy!
    Dr Vishwas Saxena

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: