चुपके से रोता है!
Posted by Rewa Smriti on November 5, 2008
वक़्त भागता है
ये सोच अक्सर
सब भागते हैं
ख्वाबों ख़यालों को
अपने साथ लिए!
जहाँ भी देखो
होड़ मची है
मंज़िल पाने की
या, ज़िंदगी से आगे
निकलने के लिए!
किसे है ख़बर
भाग दौड़ के
इस सफ़र में
यहाँ हर कदम पर
कुछ खोता हुआ
नज़र आता है!
और, कभी कभी
रात के अंधेरे
गहरे सन्नाटे में
ये दिल भी
एक ओर सिरहाने में
सिर रखकर
चुपके से रोता है!
Dr Anurag said
सोचता है भाग के पकड़ लेगा वक़्त है मगर ठहरता नही…….हर आदमी के जीवन की यही कहानी है
manvinder bhimber said
और, कभी कभी
रात के अंधेरे
गहरे सन्नाटे में
ये दिल भी
एक ओर सिरहाने में
सिर रखकर
चुपके से रोता है!
waah kya baat hai….khoobsurat
ranjana said
waah ! sach kaha,sundar kaha.
mehek said
किसे है ख़बर
भाग दौड़ के
इस सफ़र में
यहाँ हर कदम पर
कुछ खोता हुआ
नज़र आता है!
bahut sahi kaha rews,waqtke piche hum bhagte hai aur kuch khwahishe raat mein aason ban nikalti hai,yahi jeevan hai.
aap hame hamesha ek geet sunati hai,aaj aapke liye ye gana
ye jeevan hai,es jeevan ka yahi hai ,yahi hai rang roop,thodi khushiyan,thode gum hai,kabhi chav kahi dhoop.
rohit said
Rewa
Word nahi hai…kahne ko kuch
ये दिल भी
एक ओर सिरहाने में
सिर रखकर
चुपके से रोता है!
I am looking my सिरहाने, Really My Dil is there. Dil सिर रखकर
चुपके से ….है!
Kafi Kuch Kah Dala hai REWA
Last Line Punch Line.
Subhan Allaha!!!!
Rohit
Amit said
और, कभी कभी
रात के अंधेरे
गहरे सन्नाटे में
ये दिल भी
एक ओर सिरहाने में
सिर रखकर
चुपके से रोता है!
A very beautiful poem written straight from the heart. You have a very good way with words.
Nidhi said
किसे है ख़बर
भाग दौड़ के
इस सफ़र में
यहाँ हर कदम पर
कुछ खोता हुआ
नज़र आता है!
और, कभी कभी
रात के अंधेरे
गहरे सन्नाटे में
ये दिल भी
एक ओर सिरहाने में
सिर रखकर
चुपके से रोता है!
A beautiful flow. u knw ur poem is one of d most perfect poems written on todays fast life.its so beautiful nd diffrent nd full of feelings dat i lov to read.
Nidhi said
chupkey chupkey raat din aanshu bahana yaad hai
Ruchi said
us dil ko maine raat ke andhere me chupke se rota dekha hai
magar tumse milkar , usse maine muskurate bhi dekha hai
is bhaag daud ki duniya me , do roti ki chahaat me,
pardes ki dooriyon me usse khote bhi dekha hai
Kiran said
किसे है ख़बर
भाग दौड़ के
इस सफ़र में
यहाँ हर कदम पर
कुछ खोता हुआ
नज़र आता है!
Awesome poem! I am forced to think of what is important in life – home/family and knowing where I am and why.
Prem Piyush said
खुब जायज हैं ये पंक्तियाँ । क्या पाने के लिए क्या खोयें – किस हँसी के लिए किस आँसु को गले लगाएँ – बहुत बड़ा सवाल है । शायद दोनों में संतुलन बहुत कम ही रख पाते हैं । कहीं-कहीं जिन्दगी कुछ चीजों के लिए के लिए बहुत बड़ी कीमत माँग लेती है ।
हाँ बहुतेरे ऐसे है जो सिरहाने से ऐसे ही बातें करते हैं – यही शायद जिंदगी है..
bhootnath said
चुपके से वो रोता तो है…..रोते-रोते सपने भी बोता है……अपने आप को संभालता भी जाता है…..हर पल ख़ुद को कहीं खोता है….अक्सर वो अकेले में …तन्हाई को आंसुओं से भिगोता है….किसी को भूल जाने के लिए….यादों को नश्तर चुभोता है…..अभी तो वो हंस रहा था…और अब रोता है…..अब तो ऐसा लगने लगा है कि …. यादें समंदर भरा एक लोटा है…..अपने आप को भूल जाने के लिए “गाफिल”….खुदा में ख़ुद को डुबोता है…..
sandhya gupta said
Achchi rachna. Badhai.
guptasandhya.blogspot.com
amu said
Chura lo tum khushi ke pal,
mukaddar ke khajane se,
bhala kab dur hote hain,
ye gam aansu bahane se.
Dr.Abhay Kumar said
किसे है ख़बर
भाग दौड़ के
इस सफ़र में
यहाँ हर कदम पर
कुछ खोता हुआ
नज़र आता है!
हाँ कुछ ऐसा लगता है….
कोई तिमिर में खोता सा…
मुझसे दूर….
भागने की कोशिस में…
ऐसा लगता है..