तुम्हारे सामने
मैं पुरानी,
मेरी बातें भी
हो गयी पुरानी!
जब कभी तुम्हें
कुछ लगती सुनाने
तुम कहते हो -
‘यह सुना हुआ है,
कुछ नयी बताओ’!
कहाँ से लाऊँ
अब, नयी बातें
जहाँ जिक्र हो
नयी मुलाक़ातें!
और, सब कुछ
तुम्हें हमेशा,
लगे नया नया!
Posted by Rewa Smriti on October 22, 2008
तुम्हारे सामने
मैं पुरानी,
मेरी बातें भी
हो गयी पुरानी!
जब कभी तुम्हें
कुछ लगती सुनाने
तुम कहते हो -
‘यह सुना हुआ है,
कुछ नयी बताओ’!
कहाँ से लाऊँ
अब, नयी बातें
जहाँ जिक्र हो
नयी मुलाक़ातें!
और, सब कुछ
तुम्हें हमेशा,
लगे नया नया!
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