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Archive for July 13th, 2008

घर की तलाश क्यूँ…?

Posted by Rewa Smriti on July 13, 2008

एक ही सवाल जो सबके दिमाग़ में आता है, जिसे कइयों ने उठाई. कुछ के लिए बड़ी तो कुछ के लिए सीधा छोटा सा सवाल, ज़िंदगी भर का सवाल! मेरा घर कहाँ है? यानि एक लड़की का घर कहाँ है? सवाल कितना सरल और सहज लगता है. मैं सोचती हूँ, आख़िर कुछ लड़कियों के दिल में यह सवाल ही क्यूँ उठता है? जबकि हमसब जानते हें बिना नारी का घर, घर नही होता है इसलिए नारी को होम मेकर कहा जाता है!

ऐसा सवाल ही क्यूँ आता है दिमाग़ में जिसका कोई मायना ही नही? जिस तरह अपनी नाभि में स्थित कस्तूरी की गंध से भ्रमित मृग भटक रहा होता है, शायद उसी तरह आज लड़कियाँ अपने वज़ूद के तलाश में, और ज़्यादा से ज़्यादा पाने की चाह में ऐसे प्रश्‍न पूछ उसका उत्तर ढूँढती है. थोड़ा दूसरे तरफ से क्यूँ नही सोचते हें सब? क्यूँ नही ये सोचते कि हर इंसान का एक कर्मभूमि होता है!

नारी जड़ हें जिनके बिना टहनियों की कल्पना नही की जा सकती है. हमसे ही कई टहनियाँ निकलती है, और अगर जड़ नही तो इन टहनियों का कोई वज़ूद ही नही! खुद ही घर की नीव डालते हें, और खुद ही अपना घर क्यूँ तलाशती हें? प्यार से प्रफुल्लित घर में रहकर घर की तलाश करना, कहीं ऐसा तो नही ‘हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले’……!

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