होली शायद यूँ ही गुज़र जाने वाली है! इस बार मैं अपने भाई बहनों के पास भी नही जा पाई. जबकि पिछले साल हम सारे भाई बहन दिल्ली में इकट्ठे हुए थे सिर्फ़ भाई चुन्नू को छोड़कर, लेकिन इस बार वो ही उन सबके पास दो दिनों के लिए दिल्ली पहुँच चुका है और मैं यहाँ ही रह गयी. इसबार मेरा सबसे छोटा भाई देवांशु 12वीं का एग्ज़ॅम दे रहा है, इसलिए भी मैं वहाँ नही गयी. क्यूंकि अगर जाती तो सब रंगों में रंग होली खेलते और वो नही खेल पाता, फिर उसे हम सब मिस करते और उसे डिस्टर्ब भी नही होने देना चाहती.
वैसे मुझे याद है, पिछले बार भी मैं नही जा पाती लेकिन मेरी ‘छोटी’ ने सुबह-2 फोन किया और कहा ‘दीदी, तुम आ जाओ, होली में तुम्हारे हाथों का बनाया खाने को मन कर रहा है!’ उस दिन बृहस्पतिवार था, उस समय मैं ऑफिस में थी और शायद रविवार को होली था. (not remember exactly). अब देखो इंटरनेट का कमाल, I checked flight ticket for friday and I got it. I left for delhi on friday after my office. I stayed there for two days and enjoyed alot with my sisters, brother and with my friends. हम सब माँ, पापा और भाई चुन्नू को मिस कर रहे थे.
मेरी छोटी ने सभी से कह रखा था कि कोई किचन में नही जाना, ‘मुझे सिर्फ़ दीदी के हाथ से बना हुआ खाना है इसलिए किचन में कोई नही जाना.’ और सभी ने उसका कहा माना. मैं सुबह से खाना बनाने में लग गयी थी, यह दोपहर दो बजे तक चला. जब खाना बना ली तो सबने मुझे रंगों में डुबो दिया, किसी ने भी नही बक्श किया. शायद सभी मेरा ही किचन से बाहर निकलने का इंतज़ार कर रहे थे. मैने उसके फ़रमाइशों को पूरा किया, उसने जो भी बनाने को कहा, बनाया और सभी ने मज़े से खाया. भाई के दोस्तों, बहनो के दोस्तों का आना जाना लगा रहा, और कुछ मेरे दोस्त भी आए थे. अब अच्छा नही भी बना होगा तो क्या करते, सबकी मज़बूरी थी खाना पड़ा होगा. ऐसी बात नही है दोस्तों, खाना अच्छा बना था, सभी ने मस्त से खाया था. और इस तरह होली गुज़र गयी. इसबार सभी को मैं काफ़ी मिस कर रही हूँ.
कल सुबह से छोटी का कई बार फोन (miss call as my syblings use to give me) आ चुका है. वो जानती है कि इसबार उसकी दीदी वहाँ उसके पास नही पहुँच पाएगी, इसलिए उसने जिद्द भी नही किया. आज उसने गुझिया और कुछ न्यू ड्रेसेस ख़रीद मेरे लिए कूरियर कर रही है. हाँ, पॉकेट मनी उसने मेरे से ही लिया है क्यूंकि वो अभी पढ़ाई कर रही है. वैसे भी मेरा सब कुछ आख़िर उसका है, लेकिन वो पैसे मै उसे मस्ती करने के लिए दी थी.
आज अभी विजया आ रही है. हम दोनो एक ही ऑफिस में हैं, एक दूसरे के काफ़ी करीब हैं. हम दोनो एक ही यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं. वो मेरे से छोटी है, मुझे समझती है और उसका प्यार ख़ुद के प्रति देख मुझे यक़ीन ही नही होता कि घर से दूर भी मुझे इतनी अच्छी प्यारी सी बहन मिलेगी. उसका पूरा नाम ‘विजया स्मृति’ है, जब हम दोनो का नाम एक साथ कोई भी सुनता है तो सबसे पहले सबके सवाल होते हें ‘तुम दोनो सग़ी बहन हो क्या’? वैसे वो मेरा जैसे केयर करती है, वैसे एक सग़ी बहन ही करती है. नही तो मेट्रो सिटी में आज किसके पास इतना समय है जो दूसरों पर एक नज़र भी डाले.
मुझे तो ऑफीस से होली कि छुट्टी भी नही मिली है क्यूंकि हम कोरियन कॅलंडर फॉलो करते हैं और हमे कोरियन फेस्टिवल के लिए छुट्टी मिलती है. मेरे दोस्त मुझे चिढ़ाते हैं, और कहते कि ‘तुम कोरियन बन चुकी हो और कोरियन से ही शादी कर लो.’ :lol: हद है! मुझे तो डर लगता है कहीं मैं कोरियन लॅंग्वेज के चक्कर में ग़लती से इंडियन फेस्टिवल ना भूल जाऊँ. ऐसा हो सकता है क्या? A big noooo….nahiiii….कभी नही, बल्कि मैं इंडियन फेस्टिवल के साथ-साथ कोरियन फेस्टिवल भी याद रखूँगी और छुट्टियाँ मनाऊंगी. इसे कहते हैं किस्मत!
कल मेरा एक कॉलेज फ्रेंड जब ‘JNU’ के होली का वीडियो लिंक भेजा और देखने को कहा तो उसे देख दिल खुश हो गया. मैं जब भी JNU की ‘मस्त होली’ याद करती हूँ तो दिल चाहता है वहाँ अभी पहुँच जाऊँ. मैं अपनी पढ़ाई बचपन से होस्टल में रहकर की हूँ, इसलिए मेरी होली के साथ कई स्मृतियाँ बँधी हुई है. ख़ैर अब यह सब यादें ही बनकर रह गयी है. चलिए आप सब भी छुट्टियाँ मनाइए और होली के सतरंगी रंगों में रंग होली खेलिए, और मैं चली कुछ अच्छा बनाने क्यूंकि विजया ने अभी – अभी फोन किया है कि वो 11बजे तक यहाँ पहुँच रही है. बाद में बताऊँगी कि इस बार की होली कैसे गुज़री.
होरी खेले रघुवीरा अवध में, होरी खेले रघुवीरा…..A very very happy holi to all my friends.