Turning the wheel…

…..when the blue water plays with the shore to tell something…..

  • Rhythm of Heart

    वैष्णव जन तो तेने कहिए जे, पीर पराई जाने रे.....!
  • Archives

  • Categories

  • मेरा काव्यालय

  • Popular Now

  • Calendar

    February 2008
    M T W T F S S
    « Jan   Mar »
     123
    45678910
    11121314151617
    18192021222324
    2526272829  
  • Copyright

    Page copy protected against web site content infringement by Copyscape
  • Meta

Archive for February 23rd, 2008

गुमराह तो नही हुए…!

Posted by Rewa Smriti on February 23, 2008

कुछ ख़ास सड़कों की,
आज शिकायत है,
कहीं हम,
गुमराह तो नही हुए?

क्यूँ ख़ौफ़ आज,
हर राह-गुज़र के,
दिलों में,
समाने लगा है,
अपनी कामयाबी का, 
क्या यही पहचान है!

माना कि,
हम आज़ाद हें,
फिर क्यूँ,
हर कोई,
अपनी किस्मत पर,
यूँ आँसू बहा रहे हें!

भूखे भटकते,
मरते बच्चों को,
ये सड़कें,
आज बख़ूबी,
होशियारी से,
राह दिखा रही है! 

मना लो जश्न,
आज़ादी की,
कर लो सोलह सृंगार,
बस इन्हें लौटा दो,
हँसती-खेलती,
उड़ती खिलखिलाती,
इनकी खुशियों का संसार!

Posted in Own Hindi Poems | 27 Comments »